देहरादून। उत्तराखंड में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का असंतोष अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब 3000 प्राथमिक शिक्षकों ने देहरादून में एकजुट होकर बड़ा प्रदर्शन किया और सरकार से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उनका तर्क है कि वे वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं और लाखों बच्चों को शिक्षा प्रदान कर चुके हैं। ऐसे में अब नई शर्तों के आधार पर उनकी सेवा और भविष्य पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।
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प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बड़ी संख्या में शिक्षक परेड ग्राउंड और सचिवालय क्षेत्र में एकत्र हुए, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांग कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से लंबित है और सरकार को इस विषय में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के कई राज्यों में RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई है। ऐसे में उत्तराखंड के शिक्षकों के साथ अलग व्यवहार किया जाना उचित नहीं है। उनका मानना है कि अनुभव और सेवा को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना किसी परीक्षा को दिया जाता है।
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प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी प्रशासन के माध्यम से सरकार को सौंपा। उन्होंने मांग की कि RTE लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से पूर्ण छूट प्रदान की जाए, ताकि उनके रोजगार और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर शिक्षा विभाग और सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन शिक्षकों के इस बड़े प्रदर्शन ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक हितों से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।








