उत्तराखंड में आज भी कई ऐसे किस्से और कहानियां हैं जो आज भी किसी ना किसी रूप में समाज में सुनने और देखने को मिल ही जाती हैं, ऐसी ही एक अमर प्रेम कहानी है राजुला मालूशाही की जो आज भी प्यार करने वालों के लिए एक मिसाल के रूप में दी जाती है,एक बार फिर ये प्रेम कहानी दर्शकों की यादों में ताजा हो गई है हाल ही में ‘मी छौ तेरु मालु ‘ वीडियो गीत में राजुला मालूशाही की प्रेम कहानी को दर्शाया गया है।
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राजुला मालूशाही प्रेम कहानी :
राजुला मालूशाही की कहानी तो आपने जरूर सुनी ही होगी अगर भूल गए तो संक्षेप में जानिए राजुला मालूशाही उत्तराखंड की वो अमर कहानी है जिसका वर्णन सदियों से उत्तराखंड के लोकगीतों, लोकनृत्यों में होता रहा है,कत्यूरी राजवंश के राजा दुलाशाह की कोई संतान नहीं थी और उन्हें किसी ने बताया था कि बागनाथ की पूजा करके संतान प्राप्ति होगी ,उनकी मुलाकात बागनाथ मंदिर में भोट के व्यापारी सुनपत शौका से हुई जो संतान की मनोकामना लेने बागनाथ आए थे ,दोनों के बीच करार हुई अगर दोनों के घर में लड़का या लड़की का जन्म होगा तो दोनों सम्बन्धी बन जाएंगे और बागनाथ की कृपा से हुआ भी ऐसा दुलाशाह के घर मालूशाह का जन्म हुआ तो सुनपत शौका के घर राजुला का,राजा को पंडित ने बताया कि राजकुमार अल्पायु है तो मालूशाही का प्रतीकात्मक विवाह मात्र 5 दिन की आयु में राजुला से कर दिया गया,लेकिन कुछ ही समय बाद राजा दुलाशाह की मृत्यु हो गई और चारों तरफ ये बात फ़ैल गई कि राजुला अपशगुनी है जिससे राजा की मृत्यु हो गई ,समय बीतता गया और दोनों जवान हो गए ,राजुला रूपवान थी तो वहीँ मालूशाह बिगरैला जवान।
राजा दुलाशाह की मृत्यु के बाद सुनपत शौका को याद था कि राजुला और मालूशाह का बचपन में ही विवाह तय हो गया था लेकिन वहां से अब कोई खैर खबर नहीं है इसी बीच वहां हूण देश का राजा विक्खीपाल भोट पहुंच गया और राजुला का हाथ मांग लिया अगर ऐसा नहीं किया तो वो पूरा राज्य बरबाद कर देगा,वहीँ राजुला को स्वप्न में मालूशाही दिखता है और वो बैराठ जाने का फैसला करती है लेकिन मालूशाही अपनी माँ की विष दवाई से 12 वर्षों से मूर्छित था तो उसे राजुला के आने का आभाष नहीं होता तो राजुला एक अंगूठी और एक चिट्ठी मालूशाही के लिए छोड़ देती है और वापस लौट जाती है,जब तक मालूशाही को होश आया तब तक राजुला का विवाह विक्खीपाल से हो चुका था,मालूशाही ने अंगूठी और चिठ्ठी देखकर प्रण कर लिया कि वो हूण देश जाकर राजुला को विवाह कर लेकर आएगा।फिर गुरु गोरखनाथ की सहायता से मालूशाही ने हूण देश के राजा को मारकर राजुला को विवाह कर बैराठ ले आया और तबसे ये प्रेम कहानी उत्तराखंड में अमर हो गई।
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ये कहानी आपको संक्षेप में इसलिए बतानी जरुरी थी जिससे आप इस गीत को आसानी से समझ सकें,चन्दन के लिखे शब्दों को राकेश खनवाल ने खूबसूरती से गाया है रणजीत सिंह ने इसे संगीत दिया है,वीडियो में भी उसी कहानी को दर्शाया गया है जो हमने आपको ऊपर बताई,इसमें मालूशाही राजुला का सौंदर्य का वर्णन कर रहा है वीडियो में मन्नू रावत (मालूशाही ) और साक्षी कार्की (राजुला ) की भूमिका में हैं।आप भी इस अमर प्रेम कहानी के इस नवीन रूप को इंदर आर्य ऑफिसियल चैनल पर देख सकते हैं।
यहाँ देखिए वीडियो :
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