फिल्म समीक्षा : गढ़वाली फिल्म ‘बौल्या काका’ Bolya kaka रूढ़िवादी सोच पर एक गहरी चोट।

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2024 में जो बहार उत्तराखंड सिनेमा में आई थी वो इस वर्ष थोड़ी कम नजर आई लेकिन बरसात के बाद अब सिनेमा का आसमान भी खुलने लगा है,3 अक्टूबर को कोटद्वार के Phalanx Cinemas में गढ़वाली फिल्म ‘बौल्या काका’ रिलीज़ हुई,भारी संख्या में दर्शक फिल्म का पहला शो देखने पहुंची,यहाँ भी महिलाओं ने बाजी मारी और घर का कामधाम निपटा कर थोड़ा समय अपने मनोरंजन को दिया,फिल्म देखने के बाद सभी दर्शक फिल्म से काफी प्रभावित नजर आए,आइए जानते हैं फिल्म से जुडी कुछ बातें। 

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गढ़वाली फिल्म बौल्या काका (bolya Kaka) के पहले शो का शुभारम्भ राज्यमंत्री राजेंद्र अंथवाल एवं सिद्धबली धाम महाराज के हाथों हुआ,शो शुरू होने से पहले ही दर्शक सिनेमाहॉल पहुँच गए और हॉल खुलने का बेसब्री से इंतजार करते रहे,दर्शकों में महिलाओं की संख्या ज्यादा नजर आई जिससे लगता है कि पहाड़ की नारियां कहीं भी पीछे नहीं हैं।अब बात करते हैं फिल्म की और कौन-कौन इस फिल्म को असरदार बनाते हैं।

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GB प्रोडक्शन के बैनर तले बनी गढ़वाली फिल्म बौल्या काका को बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्देशक शिव नारायण रावत के निर्देशन में तैयार किया गया,फिल्म पहाड़ के कई पहलुओं को छूती है अगर कहानी की बात करें तो इसमें कई कहानियां हैं जिसे आप फिल्म में देखेंगे तो ज्यादा समझ पाएंगे,ये सिर्फ एक बौल्या काका (पगलेट चाचा) की कहानी नहीं है बल्कि इसमें कई और कहानियां हैं जो दर्शकों पर अपनी गहरी छाप छोड़ गए,इसमें एक फौजी की कहानी है उसके दोस्तों की कहानी है और एक ऐसी महिला की कहानी है जो पली बढ़ी तो शहर में लेकिन शादी उसने पहाड़ में की है जो विज्ञान को भी मानती है और आस्था पर भी उतना ही विश्वास करती है।

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मूलतः समझें तो फिल्म बस मनोरंजन के लिए ही नहीं बनती बल्कि सन्देश देने का भी काम करती हैं,शिव नारायण रावत और उनकी पूरी टीम ने इस काम को बखूबी किया,फिल्म पहाड़ में व्याप्त अंधविश्वास ,नशा का बढ़ता चलन जैसे कई मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती है फिल्म के किरदारों की अगर बात करें तो मुख्य भूमिका में बॉलीवुड अभिनेता हेमंत पांडेय रहे और उन्हीं की यात्रा में सारे किरदार जुड़ते गए,फिल्म में हेमंत पांडेय को देखकर दर्शक खूब प्रभावित हुए,मुख्य अभिनेत्री शिवानी कुकरेती के अभिनय से दर्शक खूब प्रभावित हुए,मोहित घिल्डियाल,बिपिन सेमवाल,सुमन गौड़,रिया शर्मा,अशोक नेगी,दिनेश बौड़ाई  व बाल कलाकार आर्यन बिष्ट के अभिनय को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया।

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अगर एक समीक्षक की नजरों से देखा जाए तो फिल्म सन्देशप्रद है लेकिन एक ही फिल्म में सब कुछ डालने से परहेज करना जरुरी है,इससे दर्शक फिल्म देखते देखते भटक जाते हैं,मजा तो तब आता है जब दर्शक फिल्म देखते-देखते खो जाएं और अंत में उन्हें पता लगे कि फिल्म ये कहना चाहती है,एक ही फिल्म में अन्धविश्वास,नशा का बढ़ता चलन और NRC जैसे मुद्दों को देखकर दर्शक भूल जाता है कि फिल्म में था क्या,हेमंत पांडेय के अभिनय के अनुभवों को और भी बेहतरीन ढंग से स्क्रीन पर लाया जा सकता था,बहरहाल दर्शक इस फिल्म से जुड़े और उन्हें तकनीकि पक्ष की समझ ना होते हुए भी गीत संगीत की खूब तारीफ़ की इसका श्रेय लकी गुसाईं को जाता है जिन्होंने कहानी के हिसाब से खूबसूरत गीत लिखे,तकनीकि पक्ष काफी दमदार है फिल्मांकन एवं संपादन बेहतरीन हुआ है।

फ़िलहाल अभी कोटद्वार में फिल्म लगी है ,10 अक्टूबर से उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी फिल्म देखने को मिलेगी।आप जरूर सुनिए फिल्म देखकर जनता ने क्या कहा : 

गढ़वाली फिल्म – बौल्या काका पब्लिक रिव्यु