Surkanda Devi:उत्तराखंड के सिनेमा जगत में एक नई चमक दिखाई दे रही है। जहां कुछ साल पहले तक गढ़वाली और कुमाऊँनी फिल्मों को सीमित मंच ही मिल पाता था, वहीं अब प्रदेश में एक के बाद एक बेहतरीन लोकधर्मी फिल्में बन रही हैं। इस साल के अंत तक कई नई उत्तराखंडी फिल्में रिलीज़ के लिए तैयार हैं — और इन्हीं में एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है — “सुरकुट वासनी माँ सुरकंडा।” यह फिल्म न केवल अपनी कहानी के कारण विशेष है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह देवभूमि की उस आस्था को पर्दे पर उतारती है जो हर उत्तराखंडी के दिल में बसती है।
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उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और रहस्यमयी शक्तियों पर आधारित यह गढ़वाली फीचर फिल्म माँ सुरकंडा देवी के चमत्कारों, लोक विश्वास और जद्दधर गाँव से जुड़े एक अनकहे रहस्य की कथा कहती है। फिल्म की शुरुआत जड़धार गाँव से हुई, जहाँ करीब एक महीने तक शूटिंग चली। जड़धार और उसके आसपास के लोकेशनों में फिल्माए गए दृश्य उत्तराखंड की असली सुंदरता, लोक परंपरा और आध्यात्मिकता को जीवंत करते हैं। फिल्म का मुहूर्त शॉट जून के आखिरी सप्ताह में हुआ था, और अब महीनों की मेहनत के बाद यह फिल्म पूरी तरह तैयार है।

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दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इस फिल्म का पोस्टर और प्रोमो लॉन्च भव्य तरीके से किया गया। इस मौके पर कुलदीप भंडारी, राजेंद्र चौहान, प्रेम सिंह, राजेंद्र भट्ट और फिल्म की पूरी स्टारकास्ट मौजूद रही। मंच पर “जय माँ सुरकंडा” के उद्घोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा, और यह पल उत्तराखंड सिनेमा के लिए गर्व का क्षण बन गया।
फिल्म का निर्माण पी आर फिल्म प्रोडक्शन ने किया है। निर्माता हैं प्रेम सिंह और राजेंद्र प्रसाद भट्ट, निर्देशन किया है अशोक चौहान ने, और कहानी लिखी है पदम गुसाईं ने। कैमरे की कमान राजेंद्र ने संभाली है, जबकि सिनेमैटोग्राफी और ड्रोन वर्क नागेंद्र प्रसाद ने किया है। प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संदीप असवाल के पास रही, वहीं लाइन प्रोड्यूसर संजय चमोली और को-डायरेक्टर अरविंद नेगी व मनोज चौहान हैं।

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फिल्म की स्टारकास्ट में हैं सुशीला रावत, राजेश मालगुड़ी, राकेश गौर, सावन गैरोला, बिनीता रावत नेगी, पूनम सकलानी, आयुषी जुयाल, साक्षी कला, दीक्षा बडोनी, संजय चौहान, एस.बी. नेगी, बबली अधिकारी और जगमोहन रावत। संगीत दिया है संजय कुमाला, विनोद चौहान और सुमित गुसाईं ने, जबकि सुरों में जान डाली है नरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम भरतवाण, ओम बधानी, वीरेंद्र राजपूत, पदम गुसाईं और अंजलि खरे ने। गीत भी पदम गुसाईं ने ही लिखे हैं।
“सुरकुट वासनी माँ सुरकंडा” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था, लोक संस्कृति और मातृशक्ति का प्रतीक है। यह फिल्म दिखाती है कि हमारी जड़ें हमारी देवभूमि में हैं और हमारी पहचान हमारी परंपराओं में बसती है। उत्तराखंड के सिनेमा में यह फिल्म नयी ऊर्जा भरने जा रही है — एक ऐसा दौर जहां देवभूमि की मिट्टी से निकली कहानियां न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में माँ सुरकंडा की महिमा बिखेरेंगी।







