पप्पू कार्की का गीत ‘चेली बचाया -चेलि पढ़ाया’ कर रहा समाज को जागरूक करने का काम। देखें जरूर

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BETI BACHAO ABHIYAN

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को पूरे देश का समर्थन मिला है। मकान को घर बनाने वाली स्त्री शक्ति ही होती है,जहाँ नारी की पूजा होती है वहीँ देवों का वास माना जाता है।लेकिन देवी का रूप मानी जाने वाली नारी आज स्वयं सुरक्षित नहीं है,आए दिन नारी उत्पीड़न की ख़बरें,दहेज़ के लिए अत्याचार,दुष्कर्म जैसी ख़बरें सुनने को मिलती हैं जिन्हें सुनकर मन व्यथित हो जाता है। आखिर देश की बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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बेटी तो जन्म से पूर्व ही निरादर की नजरों से देखी जाती हैं और हो न हो जन्म के बाद तो उसके जीवन का हर कदम पर संघर्ष,चुनौतियों का सामना होता है,कई कुंठित विचारधारा के लोग ये तक यह देते हैं बेटी तो पराया धन है.इसे जितना जल्दी हो सके लौटा देना चाहिए यानी विवाह करा देना चाहिए। लेकिन क्यों कोई एक बेटी से नहीं पूछता तेरे सपने क्या हैं?तुझे क्या करना पसंद हैं। विवाह कराना ही एकमात्र जिम्मेदारी नहीं बनती है और विवाह के रूप में सौदा! तो दुर्भाग्य ही है जिसे दहेज का नाम दिया गया है लेकिन फिर भी धन अर्जित करने वालों का पेट नहीं भरता और दहेज़ के कई मामले सामने आ ही जाते हैं जो की निराधार होते हैं.एक पिता के लिए सबसे बड़ा दान तो कन्यादान होता है, जब कन्यादान हो चुका तो फिर किस बात का दहेज़? इस प्रकार की मानसिकताओं का एक सही उपचार है शिक्षा एवं जनजागरूकता। भारत सरकार द्वारा योजना को नाम दिया गया बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जिससे कई चेहरों की मुस्कान लौट आई घर के आँगन से विद्यालय का रास्ता कई बेटियों ने देखा। बेटी सशक्त होंगी तभी देश का समग्र विकास हो पाना संभव है।

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इस अभियान को सहयोग स्वरुप कुमाउनी लोकगायक स्वर्गीय पप्पू कार्की ने अपनी आवाज दी और चेली बचाया (कुमाऊं में बेटी को चेली कहा जाता है ) चेली पढाया अभियान को अपना समर्थन दिया। Chandani Enterprises यूट्यूब चैनल पर वीडियो रिलीज़ किया गया है गीत की रचना जनकवि जनार्दन उप्रेती द्वारा की गई है।”देवो को वरदान चेली,जीवन को आधार चा घर बार चलोन्या वाली देवतों को उपहार चा ” गीत को पप्पू कार्की ने अपनी आवाज देकर सबको जागरूक करने का प्रयास किया जिसे संगीतकार चन्दन ने बखूबी सजाया। वीडियो में उत्तराखण्ड की उन नारियों को भी स्थान दिया गया जिन्होंने नारी शक्ति होने बाद भी अपने अदम्य साहस का परिचय दिखाया और समाज को आईना दिखाया कि नारी शक्ति किसी भी कदम पर पुरुष प्रधान समाज में पीछे नहीं हैं ,जिनमें चिपको आंदोलनकारी गौरा देवी ,वीरांगना तीलू रौंतेली, ले. नमिता पंत ,पर्वतारोही शीतल राज,यशश्वी ,एकता बिष्ट,हिमानी शिवपुरी शामिल हैं.जिन्होंने अपने हुनर के दम पर उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है।इस तरह से समाज को जागरूक करने वाले गीतों को बनाकर Chandani Enterprises के निर्माता बधाई के पात्र हैं जो संगीत के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।

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क्यों आवश्यकता पढ़ी थी इस मुहिम को चलाने की :
समाज में बेटियों को समान दर्जा दिलवाना इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य था, समाज से कन्याभूर्ण हत्या जैसे कुकृत्यों से मुक्त कराना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (इसका अर्थ है लड़कियों को बचाना और शिक्षित करना) योजना की शुरुआत भारतीय सरकार द्वारा 2015 के जनवरी महीने में हुई। इस योजना का उद्देश्य भारतीय समाज में लड़कियों और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कार्यों की कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने के लिये भी है।इस योजना की शुरुआत की जरुरत 2001 के सेंसस के आँकड़ों के अनुसार हुई, जिसके तहत हमारे देश में 0 से 6 साल के बीच का लिंगानुपात हर 1000 लड़कों पर 927 लड़कियों का था। इसके बाद इसमें 2011 में और गिरावट देखी गयी तथा अब आँकड़ा 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों तक पहुँच चुका था। 2012 में यूनिसेफ द्वारा पूरे विश्वभर में 195 देशों में भारत का स्थान 41वाँ था इसी वजह से भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति लोगों की जागरुकता जरुरी हो गयी। ये योजना कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से मिटाने के लिये लोगों से आह्वन भी करती है।

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HILLYWOOD NEWS
RAKESH DHIRWAN

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