उत्तराखंड में लगातार हो रही वर्षा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे गंभीर हालात यमुनोत्री धाम क्षेत्र में बने हुए हैं, जहाँ हाईवे पर मलबा और भूस्खलन के कारण 12वें दिन भी यातायात पूरी तरह बंद है। कई स्थानों पर पैदल आवागमन तक संभव नहीं रहा।
संचार और ऊर्जा संकट
यमुनोत्री घाटी व आसपास के गांवों में एक सप्ताह से बिजली और नेटवर्क सेवाएं ठप हैं। प्रशासन ने हेलीकॉप्टर सेवा के जरिये खरसाली में राहत सामग्री भेजने की योजना बनाई है। इसमें खाद्य सामग्री के साथ 80 लीटर डीजल भी शामिल है, ताकि जनरेटर चलाकर जरूरी सेवाएँ बहाल हो सकें।
नदी का स्तर और संरचनागत खतरे
स्याना चट्टी में यमुना नदी का जलस्तर इतना बढ़ा कि मोटर पुल पर पानी बहने लगा, हालांकि वर्तमान में बहाव सामान्य है। वहीं खराड़ी कस्बे में कुछ मकानों और होटलों में दरारें पड़ने से स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।वहीं बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गौचर-कमेडा के पास भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से आवाजाही रुक गई है। जेसीबी मशीनों की मदद से मार्ग खोलने का कार्य जारी है।
राज्यव्यापी स्थिति
314 मार्ग अब भी बंद हैं, जिनमें 8 राष्ट्रीय और 8 राज्य राजमार्ग शामिल हैं जबकि केवल चमोली जिले में 57 मार्ग अवरुद्ध हैं। वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
राज्य की वार्षिक बारिश का लगभग 70% हिस्सा जून-सितंबर में होता है, जिससे यही अवधि सबसे अधिक संवेदनशील मानी जाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पुल व सड़क मरम्मत, किसानों की क्षतिपूर्ति और अस्थायी स्कूल-अस्पताल व्यवस्था जैसे तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।


