Uttarakhand में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही मौतों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने लगे हैं। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में अब तक 15.63 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार अब तक 53 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।
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सबसे ज्यादा 28 मौतें Kedarnath Temple धाम में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा Badrinath Temple में 10, Yamunotri Temple में 8 और Gangotri Temple में 7 श्रद्धालुओं की जान गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिकांश मौतें दुर्घटनाओं की वजह से नहीं बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हुई हैं। इनमें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाई ब्लड प्रेशर और खराब मौसम मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन चढ़ाई बुजुर्गों और पहले से बीमार श्रद्धालुओं के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
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प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री Subodh Uniyal ने कहा कि कई श्रद्धालु यात्रा पूरी करने की जल्दबाजी में शरीर द्वारा दिए जा रहे शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
सरकार ने यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 47 अस्पताल स्थापित किए हैं। साथ ही करीब 2,820 स्वास्थ्यकर्मियों और 400 डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसके अलावा Doon Medical College और Srinagar Medical College के 180 डॉक्टरों को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और डायबिटीज मैनेजमेंट की विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
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सरकार अब यात्रा मार्ग पर ट्रॉमा सेंटर विकसित करने पर भी जोर दे रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज मिल सके। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं और किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।
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