Dehradun Literature Festival 2019 : दून लिटरेचर फेस्टिवल में कई नामी हस्तियों ने दिए नई पीढ़ी को पैगाम, पढ़ें रिपोर्ट

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Dehradun Literature Festival

तीन दिवसीय देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल समाप्त हो चुका है लेकिन इस फेस्टिवल से नई पीढ़ी को काफी कुछ सीखने को मिला। इसमें नई पीढ़ी को किताबों से मुहब्बत का पैगाम दिया गया । स्कूली छात्र-छात्राओं और युवाओं को डिजिटल वर्ल्ड से वापस किताबों की तरफ लौटाने पर फोकस किया गया है। यही कारण है कि फेस्टिवल में युवाओं को ध्यान में रखते हुए कई सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसकी स्थापना 2016 में अनुराग चौहान द्वारा की गई थी, जो ह्यूमन फ़ॉर ह्यूमैनिटी के संस्थापक हैं।

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शुक्रवार 11 अक्तूबर से रविवार 13 अक्तूबर तक दून इंटरनेशनल स्कूल रिवरसाइड कैंपस में फेस्टिवल का आयोजन किया गया । इसमें मार्क टुली, पद्मभूषण रस्किन बॉन्ड, करन थापर, इम्तियाज अली, रेखा भारद्वाज, विशाल भारद्वाज समेत कई नामी हस्तियां शामिल हुईं । आयोजकों के अनुसार फेस्टिवल का उद्देश्य डिजिटल क्रांति के इस दौर में किताबों और साहित्य के प्रति युवाओं में आकर्षण पैदा करना है। इसके लिए तीन दिन में आठ अलग-अलग सत्र केवल युवाओं के लिए रखे गए ।

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पहले दिन उद्घाटन के बाद पद्मभूषण रस्किन बॉन्ड ने स्कूली बच्चों से संवाद किया। रस्किन बॉन्ड का ज्यादातर लेखन बच्चों के लिए है। बच्चे उनसे बातचीत करना चाहते हैं, जिसका उन्हें यहां अवसर मिलेगा। उसके बाद ‘बॉन्ड स्कूल हेड’ ने संवाद किया, जिसमें साहित्य को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की गई । दूसरे दिन कर्नल (सेनि) राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दोपहर एक से दो बजे तक यूथ एंड एक्सपेक्टेशन सत्र में संजय अरोड़ा से बातचीत की।

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यह सत्र भी पूरी तरह युवाओं के लिए समर्पित रहा । अंतिम दिन कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने पर परिचर्चा की गयी । तीन दिन के फेस्टिवल में कुल 45 सत्र आयोजित किए गए । पहले दिन शुक्रवार को उद्घाटन समेत कुल छह सत्र हुए दूसरे दिन शनिवार 12 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से शाम आठ बजे तक 22 सत्र आयोजित किए गए । अंतिम दिन रविवार 13 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से शाम आठ बजे तक 17 सत्र हुए । इस दौरान कई किताबों का विमोचन और पुस्तकों पर चर्चा की गयी। साथ ही साहित्य और लेखन से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए । अंग्रेजी साहित्य के साथ ही हिंदी कविता और लेखन पर भी चर्चा की गई।

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