बद्रीनाथ धाम में DJ और तेज संगीत को लेकर विवाद बढ़ा। तीर्थ पुरोहितों ने धार्मिक मर्यादा पर सवाल उठाए, जबकि चमोली प्रशासन ने आयोजन को लेकर सेना से जवाब मांगा। badrinath dj controversy
चमोली, उत्तराखंड: बद्रीनाथ धाम में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तेज संगीत और DJ बजाने को लेकर विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आयोजन के स्वरूप, अनुमति और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। तीर्थ पुरोहितों और संतों ने धाम की धार्मिक मर्यादा का मुद्दा उठाया है। वहीं, चमोली जिला प्रशासन ने इस मामले में भारतीय सेना से जवाब मांगा है।
कार्यक्रम की अनुमति और जिम्मेदारी पर उठे सवाल
शुरुआत में सामने आया था कि बद्रीनाथ धाम में आयोजित यह कार्यक्रम चमोली जिला प्रशासन और भारतीय सेना की ओर से संयुक्त रूप से कराया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ने पर आयोजन की जिम्मेदारी और अनुमति को लेकर स्थिति पर सवाल उठने लगे।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चयन और उनके स्वरूप में जिला प्रशासन की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में प्रशासन से पहले कोई अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन ने आयोजन को लेकर सेना से जवाब मांगा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
कार्यक्रम को मौके पर कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र रावत के अनुसार, आयोजन के दौरान वहां किसी तरह का विरोध नहीं हुआ था। उनके मुताबिक, 21 सितंबर के बाद कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा।
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वीडियो सामने आने के बाद बद्रीनाथ धाम में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने के औचित्य और उनके स्वरूप को लेकर चर्चा शुरू हो गई। तीर्थ पुरोहितों और संतों ने धार्मिक स्थल की गरिमा और परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मंत्री सतपाल महाराज ने क्या कहा?
उत्तराखंड के धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने BBC News Hindi से बातचीत में कहा कि बद्रीनाथ में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर परंपरा के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। उनके बयान के बाद इस विषय पर चर्चा और तेज हो गई है कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखते हुए सांस्कृतिक आयोजनों का स्वरूप किस तरह तय किया जाना चाहिए।
अब किस बात का इंतजार?
फिलहाल, इस मामले में आयोजन की जिम्मेदारी, कार्यक्रम के स्वरूप और अनुमति से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। जिला प्रशासन की ओर से सेना से जवाब मांगे जाने के बाद आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। यह मामला धार्मिक स्थल की मर्यादा, सांस्कृतिक आयोजनों और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़े सवालों को सामने लाता है।
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