Vijaydashami : पाप का अंत है रावण का दहन,8 अक्टूबर विजयदशमी में मनाया जायेगा दशहरा
जब किसी व्यक्ति का ज्ञान अभिमान में परिवर्तित हो जाता है तो मस्तिष्क मे पाप का विकास होने लगता है। पाप ज्यादा बढ़ तो जाता है किन्तु अच्छाई के सामने पाप हमेशा छोटा ही होता है और उसका अंत होना निश्चित हो जाता है।कुछ ऐसा ही अधर्म व पाप के अंत का पर्व है रावण दहन यानी दशहरा का पर्व।
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रावण दहन यानी दशहरा वह पर्व है जिसे समस्त भारतवासी बड़े उत्साह से मनाते है और मनाये भी क्यों नहीं आज के अधर्म पर धर्म की विजय हुई थी। इस दिन प्रभु राम ने अधर्मी रावण का वध किया था। आज भी पूरे भारतवर्ष में दशहरे के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती है। देश भर में रावण का पुतला बनाया जाता है तथा दशहरे के दिन पुतले को जला दिया जाता है।
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इस वर्ष 8 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन दशहरा मनाया जायेगा। धार्मिक कथाओ के अनुसार इसी दिन श्री राम ने रावण का अंत किया था। रावण था तो महाज्ञानी महापंडित किन्तु अपने अभिमान के कारण उसे मरना पड़ा। रावण दहन के समय कई समाजिक बुराईयो का नाश होता है। किन्तु सोचनीय बात यह है की क्या हम अपने अंदर पैदा रावण का दहन कर पाते है ? शायद नहीं हम सिर्फ हर वर्ष एक पुतले को जला देते है। सिर्फ एक दिन धर्म की बाते करते है किन्तु दूसरे ही पल हम अपने मन में पाप द्धेष को पैदा कर लेते है।
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इस वर्ष रावण दहन के साथ साथ अपनी मानसिक बुराईयों को भी अग्नि में दहन जरूर करे। अन्यथा जिस प्रकार अभिमान व पाप करने के कारण रावण का अंत हुआ उसी प्रकार हमारा अंत भी निश्चित होगा।
सीमा रावत की रिपोर्ट



