चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ आज 30 मार्च से हो रहा है, जो मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इस पहले दिन, मां शैलपुत्री की विधिपूर्वक पूजा की जाती है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं और भक्तों के कष्टों को हरने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं।
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आइए जानते हैं कि मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करें और इसका महत्व क्या है:
मां शैलपुत्री की पूजा विधि:
1. प्रातःकाल स्नान और स्वच्छता: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपने आप को पूजा के लिए तैयार करें।
2. पूजा स्थल की तैयारी: एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और मां शैलपुत्री की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
3. स्थान का पवित्रीकरण: गंगाजल से स्थान को पवित्र करें और मां को आमंत्रित करने का संकल्प लें।
4. कलश स्थापना: एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं और उसे पूजा स्थल पर रखें।
5. पूजन सामग्री की तैयारी: लाल पुष्प, चंदन, अक्षत (चावल), धूप, दीपक, दूध, घी, शहद और गंगाजल जैसी पूजन सामग्री तैयार रखें।
6. पूजा का आरंभ: मां शैलपुत्री की पूजा का आरंभ करें और उन्हें पूजन सामग्री अर्पित करें।
7. मंत्रों का जाप: मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करें और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करें।
8. आरती और समापन: मां शैलपुत्री की आरती करें और पूजा का समापन करें।

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मां शैलपुत्री की आराधना का महत्व:
मां शैलपुत्री की आराधना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यहाँ कुछ विशेष तरीके हैं जिनका पालन करके आप मां शैलपुत्री की आराधना कर सकते हैं:
1. सफेद फूलों और गाय के घी से बने प्रसाद का भोग: मां शैलपुत्री को सफेद फूल और गाय के घी से बने प्रसाद का भोग अर्पित करें।
2. दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ: दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ करें और मां शैलपुत्री की महिमा को समझें।
3. मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप: मां शैलपुत्री के मंत्र “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” का 108 बार जाप करें और मां की कृपा प्राप्त करें।
4. दीप जलाकर मां की आरती: दीप जलाकर मां की आरती करें और भोग अर्पित करें।
5. व्रत और पारणा की विधि: उपवासी श्रद्धालु इस दिन केवल फलाहार का सेवन करें और मां को सफेद रंग की वस्तुएं अर्पित करें।



