महाकुंभ की ‘खूबसूरत साध्वी’ से बनीं स्वामी हर्षानंद गिरि, ग्लैमर छोड़ संन्यास तक का पूरा सफर

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From the ‘Beautiful Sadhvi’ of the Mahakumbh to Swami Harshanand Giri: The Complete Journey—From Glamour to Renunciation
From the ‘Beautiful Sadhvi’ of the Mahakumbh to Swami Harshanand Giri: The Complete Journey—From Glamour to Renunciation

उत्तर प्रदेश के झांसी से निकलकर ग्लैमर और मॉडलिंग की दुनिया में पहचान बनाने वाली हर्षा रिछारिया अब संन्यास ग्रहण कर ‘स्वामी हर्षानंद गिरि’ बन चुकी हैं। सोशल मीडिया स्टार, मॉडल और एंकर के रूप में चर्चित रहीं हर्षा की यह आध्यात्मिक यात्रा इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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26 मार्च 1994 को झांसी में जन्मीं हर्षा रिछारिया एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता दिनेश रिछारिया बस कंडक्टर हैं, जबकि मां किरण रिछारिया बुटीक चलाती हैं। बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वे प्रमोशनल इवेंट्स में काम करती थीं और बाद में एंकरिंग, मॉडलिंग व इवेंट मैनेजमेंट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली। सोशल मीडिया पर भी उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और लाखों लोग उन्हें फॉलो करने लगे।

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जनवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान हर्षा पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आईं। निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में भगवा वस्त्र, रुद्राक्ष की माला और तिलक लगाए उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। देखते ही देखते उन्हें “खूबसूरत साध्वी” के नाम से पहचान मिलने लगी। वायरल होने के बाद उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। हालांकि उस समय उन्होंने साफ कहा था कि उन्होंने संन्यास नहीं लिया है, बल्कि वे केवल मंत्र दीक्षा ले रही हैं और सनातन संस्कृति के करीब आकर मानसिक शांति की तलाश कर रही हैं।

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करीब एक साल बाद अप्रैल 2026 में अक्षय तृतीया के अवसर पर उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागने का निर्णय लिया। उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के सानिध्य में उन्होंने विधिवत संन्यास दीक्षा ग्रहण की। सनातन परंपरा के अनुसार उन्होंने स्वयं का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी किया, जिसे पुराने सांसारिक जीवन के अंत का प्रतीक माना जाता है। दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम ‘स्वामी हर्षानंद गिरि’ दिया गया।

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हालांकि संन्यास लेने के बाद भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। मई 2026 में मध्य प्रदेश संत समिति के कुछ वरिष्ठ संतों ने उनके इतनी जल्दी संन्यास लेने पर सवाल उठाए और इसे “पब्लिसिटी स्टंट” तक बता दिया। कुछ आरोप विदेशी फंडिंग को लेकर भी लगाए गए। इन आरोपों पर स्वामी हर्षानंद गिरि ने कड़ा जवाब देते हुए आरोप लगाने वालों को एक करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस देने की बात कही और अपने बैंक खातों की जांच कराने की चुनौती भी दी।

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इसी बीच उज्जैन के एक कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू युवतियों को “लव जिहाद” से सतर्क रहने की शपथ दिलाई और आत्मरक्षा के लिए तलवारें वितरित कीं। इस घटना के बाद वे एक बार फिर मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं।

ग्लैमर की दुनिया से आध्यात्मिक जीवन तक का यह सफर आज भी लोगों के लिए जिज्ञासा और बहस का विषय बना हुआ है। कोई इसे आत्मिक परिवर्तन मान रहा है तो कोई इसे चर्चा में बने रहने की रणनीति बता रहा है, लेकिन इतना तय है कि स्वामी हर्षानंद गिरि का नाम फिलहाल लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।