
देहरादून। उत्तराखंड के लोकसंगीत प्रेमियों के लिए एक और शानदार सौगात सामने आई है। Bugyal Production के बैनर तले बहुप्रतीक्षित गढ़वाली गीत “हे लट्याला” He Lathyala आधिकारिक रूप से रिलीज हो चुका है। रिलीज के साथ ही यह गीत सोशल मीडिया और यूट्यूब पर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी निर्माता (Producer) अंजलि नेगी हैं, जिन्होंने न केवल इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया बल्कि गीत के बोल (Lyrics) और कंपोजिशन (Composition) भी स्वयं तैयार किए हैं। अपनी रचनात्मक सोच और लोक संस्कृति की झलक को उन्होंने इस गीत में बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया है।
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गीत को अंजलि नेगी और सुधांशु कुमोला ने अपनी मधुर आवाज़ दी है। दोनों गायकों की जुगलबंदी गीत को और भी आकर्षक बनाती है। वहीं संगीतकार सुशांत मोहन ने आधुनिक संगीत और पारंपरिक गढ़वाली धुनों का शानदार मिश्रण तैयार किया है, जबकि सुभाष पांडे द्वारा दिया गया रिदम गीत की ऊर्जा को और बढ़ाता है।
वीडियो में अंजलि नेगी, जीत चंद्रियाल और विशाल बिष्ट मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। कलाकारों की शानदार स्क्रीन प्रेजेंस, भावपूर्ण अभिनय और बेहतरीन कैमिस्ट्री दर्शकों को गीत से अंत तक जोड़े रखती है।
म्यूजिक वीडियो का निर्देशन और कोरियोग्राफी अजय के. भारती ने की है। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, रंगों और लोकजीवन को आधुनिक सिनेमैटिक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है। वहीं डीओपी कुनाल पपोला की शानदार सिनेमैटोग्राफी वीडियो को और भी आकर्षक बनाती है। रोहित निशाद ने सहायक डीओपी के रूप में इस प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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गीत के रिलीज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के कई प्रसिद्ध कलाकारों संजय कुमोला, मीना राणा, जस पंवार, रोहित चौहान, सौरभ मैठाणी, अब्बू रावत, प्रशांत गगोड़िया, शेखर नौटियाल, सीमा भारती, संजय भण्डारी, अजय भारती आदि सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। Hilly News ने कार्यक्रम के दौरान कई कलाकारों और मेहमानों से खास बातचीत की, जिसमें सभी ने “हे लट्याला” की कहानी, संगीत, प्रस्तुति और पूरी टीम की मेहनत की खुलकर सराहना की। कलाकारों का कहना था कि इस तरह के गीत उत्तराखंड की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रिलीज के बाद से ही “हे लट्याला” को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में यह गीत उत्तराखंड के लोकप्रिय गढ़वाली गीतों की सूची में अपनी मजबूत जगह बनाएगा।







