1986 में रिलीज़ हुई गढ़वाली फ़िल्म घरजवै जैसी सफलता आज तक किसी को नहीं मिली है। उत्तराखंडी सिनेमा के इतिहास में घरजवै किसी धूमकेतु की तरह है, जिसकी चमक लगातार बरकरार है। सफलता कहानी जितनी दिलचस्प है, उसी तरह उस कहानी में भी कई रंग छिपे हैं, जो फ़िल्म के निर्माण से जुड़ी है। यूं ही कोई लोकप्रिय नहीं बनती l

घरजवैं फिल्म को उत्तराखंड की शोले भी कहा जाता है। जिस तरह हिंदी फिल्म शोले कई सालों तक थियेटर में चलती रही। उसी तरघरजवैं फिल्म को उत्तराखंड की शोले भी कहा जाता है। जिस तरह हिंदी फिल्म शोले कई सालों तक थियेटर में चलती रही। उसी तरह घरजवैं फिल्म भी दिल्ली के संगम सिनेमा हॉल में लगातार २९ हफ्ते तक चली थी। दावा ये भी किया जाता है कि घरजवैं उत्तराखंड की एकमात्र फिल्म है, जो 35MM में बनी है। आज किसी उत्तराखंडी फिल्म के बारे में ऐसा सोच भी पाना मुश्किल लगता है।
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आपको बता दें कि घरजवैं को गढ़वाली की सुपरहिट फिल्म का दर्जा हासिल है। 1986 में आई इस फिल्म के गीत ‘रुम झुमा…’ आदि आज भी बहुत मशहूर हैं।आपको यकीन नहीं होगा कि दिल्ली के संगम थिएटर में यह फिल्म लगातार 29 हफ्ते चली थी। उस वक्त यह सबसे महंगी गढ़वाली फिल्म भी कहीं गई थी, जिसके निर्माण में करीब 35 लाख का खर्च आया था।साथ ही आपको बता दें घरजवैं उत्तराखंड की सबसे लोकप्रिय फिल्म मानी जाती है जिसके निर्देशक विश्वेश्वर दत्त नौटियाल थे।यह एक मात्र 35 mm की गढ़वाली फिल्म थी। आप इस फिल्म की लोकप्रियता के बारे में इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं की इसे दिल्ली के संगम सिनेमा हॉल में इसे लगातार 29 हफ्ते तक दिखाया गया था। इस फिल्म के गीतों को भी बहुत पसंद किया गया था, इस फिल्म के सभी गीत नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा गए थे। माना जाता है की इसी फिल्म की वजह से ही हर किसी की जुबान पर नेगी डा के गीत चढ़ने लगे थे।
मुख्य किरदार –
बलराज नेगी -फिल्म के मुख्य कलाकार हीरो बलराज नेगी से। बलराज नेगी फिल्म में न सिर्फ हीरो थे, बल्कि प्रोडक्शन की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी। बलराज नेगी आज भी उत्तराखंडी सिनेमा जगत से जुड़े हुए हैं। बलराज नेगी देहरादून में रहते हैं। कुछ समय पहले वह ‘सुबेरो घाम’ फिल्म में एक फौजी के तौर पर नजर आए।बहुत कम लोग जानते हैं कि बलराज नेगी का असली नाम बलवीर सिंह नेगी है लेकिन सिनेमा की बड़ी दुनिया में आने के लिए लोगों ने आपको अपना नाम बदलने और छोटा करने की सलाह दी , इस तरह बलबीर सिंह नेगी सिनेमा व रंगमंच की दुनिया के लिए बलराज नेगी हो गए l

शांति चतुर्वेदी
घरजवैं फिल्म की लीड एक्ट्रेस पहले शांति चतुर्वेदी नहीं थीं। लेकिन एक घटना की वजह से फिल्म में उनकी एंट्री हुई। शांति चतुर्वेदी एक अभिनेत्री हैं। घरजवैं फिल्म करने से पहले वह राजस्थानी और हरियाणवी फिल्मों में काम करती थीं। शांति चतुर्वेदी मौजूदा समय में मुंबई में रहती हैं। आज भी वह नृत्य सिखाने और अभिनय के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
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दिलचस्प किस्से – फ़िल्म के 2 गाने, छम घुंघरू और रूमझूमा से जुड़ी है।इन गानों की शूटिंग सुबह 10 बजे से लेकर अगली सुबह 4 बजे तक चली थी। दूसरी बात, सुपरहिट गीत चिट्ठी किले नी भेजी देवी प्रसाद सेमवाल ने पूरा लिख दिया था, लेकिन फ़िल्म की कहानी के अनुरूप संगीतकार नरेंद्र सिंह नेगी कुछ लाइनों में बदलाव चाहते थे। उन्होंने बहुत माथापच्ची की, पर बात नहीं बनी। बाद में वे बाथरूम में घुसे और वहां से निकल कर फिर फ़िल्म के हीरो बलराज नेगी से मुखातिब होकर बोले-बलराज लाइन मिल गई। ये लाइन थीं-लेके आणू छो बरात, अब तो उमर भर कु साथ। तीसरी बात, फ़िल्म के संगीतकार बतौर पहले नेगी दा को साइन नहीं किया गया था, लेकिन बाद में उनकी जरूरत महसूस करते हुए उन्हें साइन किया गया।

डर गए थे सब –
रुमा-झुमा गाने की शूटिंग फिल्मीस्तान स्टूडियो मे होनी थी। भारती-बलराज समेत अन्य कलाकार यहां पहुंच चुके थे। फिल्म की हिरोइन भारती को पहाड़ी लिबास दिया गया। लेकिन हिरोइन की मां को ये लिबास पसंद नहीं आया। उसने कपड़ों को बाहर हिरोइन के कमरे के बाहर फेंक दिया। वह कहने लगी कि उसकी बेटी हिरोइन है और वह ऐसे कपड़े नहीं पहनेगी। इस पर फिल्म के निर्माता नौटियाल जी नाराज हो गए। उन्होंने पैकअप करवा दिया और उस हिरोइन को फिल्म से निकाल दिया। उसके बाद सबको लगा की यह फिल्म अब नहीं बन पाएगी l लेकिन उसके कुछ वक्त शांति चतुर्वेदी को मुख्य किरदार में लिया गया और पुनः कार्य को शुरू किया l
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गढ़वाल की सुपर डुपर हिट रही फीचर फिल्म घरजवैं कई तरह की समस्याओं के साथ गुजरने के बाद भी अपार सफलता हासिल कर गई और आज तक उस जैसी गढ़वाली फिल्म उत्तराखंड में देखने को नहीं मिली अब समय के साथ साथ बढ़ते आयामों के बीच किस चीज की कमी उत्तराखंड के सिनेमा को खा गई वह आज भी समझ से परे है l
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