हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों की संदिग्ध मौत के मामले में उत्तराखंड वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही मानते हुए श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय कुमार राठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस घटना ने पूरे प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई उत्तरांचल सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान विनय कुमार राठी को हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। बताया जा रहा है कि मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की संस्तुति के बाद यह फैसला लिया गया।
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दरअसल, कुछ दिन पहले श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट में दो बाघों के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया था। शुरुआती जांच में यह मामला शिकार का माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि शिकारियों ने बाघों को जहर देकर मौत के घाट उतारा। मामले को और गंभीर तब माना गया जब दोनों मृत बाघों के पंजे गायब मिले। इससे वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार गिरोह की सक्रियता की आशंका और मजबूत हो गई।
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वन विभाग और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए पहले एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। हालांकि अभी भी कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। विभाग का कहना है कि इस पूरे मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना के बाद हरिद्वार से लेकर देहरादून तक वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। साथ ही बाघों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही जा रही है।








