उत्तराखण्डी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु नेगी दा की” धै ” ! कब जागेगी सरकार ?

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उत्तराखण्ड की लोकप्रिय आवाज गढ़रत्न अपने गीतों से आज जिस मुकाम पर हैं उनके कन्धों पर उतनी ही जिम्मेदारी अपनी संस्कृति के प्रति भी है ,अपने गीतों के माध्यम से गढ़रत्न नेगी ने हर दर्द को आवाज दी है। चाहे पहाड़ी नारी का दर्द हो या उम्र का पड़ाव पार कर चुका वृद्ध हर किसी की पीड़ा को गीतकार एवं लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने गीतों के माध्यम से उकेरा।

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एक गीतकार गायक होने के साथ ही गढ़रत्न नेगी एक कवि भी हैं और कई मंचों से अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं,कवि सम्मेलन को भाषा का आंदोलन कहने वाले कवि नेगी उत्तराखण्ड की लोकभाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करवाने हेतु लगातार प्रायसरत हैं।

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गढ़वाली कवि सम्मेलन के दौरान लोककवि नरेंद्र सिंह नेगी की कविता मुल्क को रैबार त्वेकू ,ठेर खड़ा-खड़ी सुणिक जा।सरकार के प्रति एक “धै ” पुकार है। साथ ही युवा पीढ़ी को भी अपनी लोकभाषा सीखने का सन्देश दिया है।

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गढवाली कवि सम्मेलन के संरक्षक नरेन्द्र सिंह नेगी हैं तथा संयोजन समाजसेवी संजय शर्मा दरमोडा ,एवं संचालक ओम प्रकाश सेमवाल हैं। ओम बधाणी ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर यह कवि सम्मेलन उपलब्ध है देखिए क्या कहते हैं गढ़रत्न लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी।

Hillywood News
Rakesh Dhirwan

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