प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बायोपिक आज देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ !दर्शक बोले विवेक की एक्टिंग शानदार

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जीतने का मजा तब आता है, जब सब आपके हारने की उम्मीद करते हैं! फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का यह डायलॉग इस फिल्म की पूरी कहानी कह देता है। दो महीने से भी कम टाइम में तैयार हुई यह फिल्म रिलीज तो 11 अप्रैल को होनी थी, लेकिन विपक्षी पार्टियों के विरोध के चलते चुनाव आयोग ने आचार संहिता के दौरान इसकी रिलीज पर रोक लगा दी थी। आखिरकार अब यह फिल्म रिलीज हो रही है। लोकसभा चुनाव में मोदी की बंपर जीत 23 मई को हुई है, लेकिन फिल्म के निर्माताओं ने पहले से ही अपनी फिल्म के पोस्टरों पर पीएम नरेंद्र मोदी की वापसी की भविष्यवाणी कर दी थी।

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कहानी: नरेंद्र मोदी के बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की कहानी कहती इस फिल्म की कहानी की शुरुआत 2013 की बीजेपी की उस बैठक से होती है, जिसमें नरेंद्र मोदी (विवेक ओबेरॉय) को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया जाता है। उसके बाद फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है, जब मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे। मोदी के पिता चाय की दुकान करते थे, तो मां घरों में बर्तन मांजती थीं। थोड़ा बड़ा होने पर नरेंद्र ने अपने घरवालों से संन्यासी बनने की इजाजत मांगी, तो घरवालों ने उन्हें शादी के बंधन में बांधने की सोची, लेकिन नरेंद्र ने शादी से पहले ही घर छोड़ दिया। हिमालय की चोटियों में अपने जीवन का उद्देश्य तलाशने के बाद नरेंद्र ने बतौर आरएसएस वर्कर गुजरात वापसी की और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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अभिनय की बात करें तो विवेक ओबेरॉय मोदी की नकल ना करते हुए भी मोदी लगने में सफल हुए हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के किरदार में मोहन जोशी ने भी अच्छा परफॉर्मेंस दिया है। जरीना वहाब और राजेंद्र गुप्ता जैसे वरिष्ठ कलाकार स्क्रीन की शोभा को दोगुना कर देते हैं। तकनीकी रूप से फिल्म की सिनेमैटोग्राफी कमाल की है।फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर उम्दा है जिसके कारण फिल्म आप को बांधे रखती है।

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मोदी ने किस तरह गुजरात के सीएम से लेकर भारत के पीएम तक की गद्दी हासिल की? यह जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा। खासकर फिल्म में मोदी से जुड़े चाय बेचने वाला, शादी, गुजरात दंगे और उनकी जिंदगी से जुड़े तमाम दूसरे सवालों का जवाब देने की कोशिश की गई है। वहीं फिल्म मोदी की जिंदगी के कई अनछुए पहलुओं से भी रूबरू कराती है। फिल्म को सत्य घटनाओं से प्रेरित बताया गया है, लेकिन विवादों से बचने के लिए शुरुआत में लंबा-चौड़ा डिस्क्लेमर दिया गया है।

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कुल मिलाकर अगर आप पीएम मोदी की जिंदगी और जीवन में आए उतार-चढ़ाव के बारे में जानना चाहते हैं तो यह फिल्म आप देखने जा सकते हैं। फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से गुजरात, मुंबई और उत्तरकाशी में हुई है। मोदी की बायोपिक 23 भाषाओं में एक साथ रिलीज हुई।

Hillywood News
Rakesh Dhirwan

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