ऋषिकेश: बापू ग्राम में विस्थापन के खिलाफ जन-आंदोलन तेज़, पत्रकार आरती गौड़ की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया जनता का दर्द

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Rishikesh: Public protests against displacement intensify in Bapu Village; journalist Aarti Gaur's ground report reveals public anguish.

ऋषिकेश। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद ऋषिकेश के बापू ग्राम सहित 12 नगर निगम वार्डों के हजारों निवासियों पर बेदखली का संकट गहरा गया है। इस गंभीर ज़मीनी हकीकत को उजागर करने के लिए हिली न्यूज़ की वरिष्ठ पत्रकार आरती गौड़ ने बापू ग्राम के धरना स्थल से एक व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले लगभग पांच महीनों से अपनी छतों को बचाने के लिए कड़कड़ाती धूप और बारिश में धरने पर बैठे स्थानीय निवासियों का दर्द इस रिपोर्ट में साफ़ देखा जा सकता है।

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क्या है पूरा विवाद?

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायालय के एक फैसले के बाद ऋषिकेश के बापू ग्राम और आसपास के 11 अन्य वार्डों को वन भूमि घोषित कर वहां से अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
  • पीढ़ियों का आशियाना: स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे यहाँ पिछले 70 से 80 वर्षों (लगभग तीन पीढ़ियों) से रह रहे हैं। सरकार ने ही उन्हें बिजली, पानी, सड़क और राशन कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं दी हैं, तो अब उन्हें अचानक ‘अवैध’ कैसे कहा जा सकता है?
  • अस्तित्व की लड़ाई: बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोग अपनी ज़मीन और आशियाने की सुरक्षा के लिए लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं।

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महारैली और जनता का आक्रोश

इस संकट के खिलाफ हाल ही में आईडीपीएल मैदान से लेकर तहसील कार्यालय तक एक विशाल महारैली निकाली गई। इस महारैली में हजारों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन और नेताओं के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और अध्यादेश (Ordinance) लाकर उनकी ज़मीनों को नियमित करने की मांग की है।

आरती गौड़ की ग्राउंड रिपोर्ट के मुख्य अंश

धरना स्थल से की गई इस रिपोर्टिंग में स्थानीय महिलाओं ने रोते हुए पत्रकार आरती गौड़ को बताया कि अगर उनके आशियाने उजाड़े गए, तो वे अपने बच्चों को लेकर कहाँ जाएंगे। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले नेता आज इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े नहीं हो रहे हैं। आरती गौड़ की इस रिपोर्ट ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस मानवीय संकट की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

आगे की राह

स्थानीय विधायकों और नेताओं ने जनता को आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे ताकि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका या कोई कानूनी बीच का रास्ता निकाला जा सके। हालांकि, जब तक कोई ठोस लिखित आश्वासन या सरकारी आदेश नहीं आता, तब तक बापू ग्राम के निवासियों ने अपना धरना और आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया है।

वीडियो यहां देखें –