
Sanskriti Vibhag Uttarakhand :संस्कृति विभाग पर लगे आरोप ,भड़के कलाकार
उत्तराखंड के कलाकार जो की अपनी कलाओं से दुनिया भर में उत्तराखंड की संस्कृति का प्रचार प्रसार कर रहे है। हमेशा कलाकारों के बारे में सुनने को आता है की उनके पास बहुत पैसा है इसलिए वो बाहर विदेशो में शो कर रहे है जबकि सच्चाई कुछ है। आपको बता दें कि देश प्रदेश में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देने के लिए किसी भी कलाकार को संस्कृति विभाग द्वारा चुना जाता है तथा संस्कृति विभाग द्वारा चयनित होने के बाद वह कलाकार मंच पर प्रस्तुति करता है।
Sanskriti Vibhag Uttarakhand
क्या है संस्कृति विभाग ?
आपको बता दें की राज्य की सरकार द्वारा प्रदेश की लोक कला और संस्कृति को संरक्छण देने के लिए संस्कृति विभाग का गठन किया गया है और इस विभाग के संस्कृति मंत्री तक होते है। संस्कृति विभाग का काम होता है की यह लोक कलाकारों और लोक गायकों को आगे लाये तथा उनके जरिये राज्य की संस्कृति को आगे बढ़ायें । इस काम के लिए कलाकर को मेहताना भी दिया जाता है, जो कि उत्तराखंड संस्कृति विभाग में ना के बराबर रखा गया है। कुछ समय से देखने को मिल रहा है की संस्कृति विभाग पर कुछ कलाकारो द्वारा काफी गंभीर आरोप लगाए जा रहे है |जिसमे कलाकारों का कहना है की संस्कृत विभाग द्वारा कलाकारों का शोषण किया जा रहा है।
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आखिर क्यों लग रहे है संस्कृति विभाग पर आरोप ?
आपको बता दें कि हाल ही में किशन महिपाल ने हिलीवूड न्यूज़ शो के दौरान अपने इंटरव्यु में कहा था कि संस्कृति विभाग जिसका काम कलाकारों को आगे बढ़ाने का है वहीं संस्कृति विभाग कलाकारों का शोषण कर रही है। साथ ही बताया की जब संस्कृति विभाग द्वारा कलाकारों को किसी प्रोग्राम में भेजा जाता है तो उन्हें मात्र 350 रूपये ही मेहताना दिया जाता है वो भी 2 या 3 साल बाद दिया जाता है। किशन महिपाल ने अपने इंटरव्यू में संस्कृति विभाग की कई पोल खोल के रख दी। किशन महिपाल ने बताया कि किस तरह का व्यवहार संस्कृति विभाग द्वारा किया जाता है। साथ ही किसी भी प्रोग्राम में कलाकारों को उचित व्यवस्था भी नहीं दी जाती है।
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नहीं दी जाती कलाकारों को उचित व्यवस्था-किशन महिपाल
किशन महिपाल ने कहा की संस्कृति विभाग द्वारा किसी भी प्रोग्राम में उचित व्यवस्था नहीं दी जाती जबकि जब कोई बाहर का कलाकार यहां प्रस्तुति के लिए आता है तो उन्हें उच्च व्यवस्था दी जाती है। अर्थात उत्तराखंड का संस्कृत विभाग उत्तराखंड के कलाकारों से ही ऐसा व्यवहार करता है जबकि उत्तराखंड के कलाकार उत्तराखंड की संस्कृति को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
देखें किशन महिपाल ने क्या कहा :-
किशन महिपाल ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा की कई ऐसे कलाकार भी है जिनका मेहताना अभी तक नहीं दिया गया। कई हजारो और लाखो रूपये अभी तक कलाकारों के मिले नहीं है जो की संस्कृति विभाग द्वारा दिए जाने थे जो की 3 4 सालो बाद भी नहीं दिए गए। इसी में किशन महिपाल ने एक नाम प्रेम हिंदवाल का लिया जिन्हे संस्कृति विभाग द्वारा मेहताना नहीं दिया गया। प्रेम हिंदवाल का नाम सामने आने के कुछ दिन बाद प्रेम हिंदवाल भी एक इंटरव्यू में सामने आये।
प्रेम हिंदवाल ने सामने आकर संस्कृति विभाग के कई राज़ खोल दिए। प्रेम हिंदवाल ने कहा की वो 30 वर्षो तक संस्कृति विभाग के लिए काम किया किन्तु जब संस्कृति विभाग द्वारा उनको 2 3 वर्षो तक मेहताना नहीं दिया गया तब उन्हें मजबूरन विभाग को एक खत लिखना पड़ा जिसमे उन्होंने लिखा की आज के बाद वो कभी संस्कृति विभाग के लिए काम नहीं करेंगे तथा यह भी लिखा की कृपा मुझे मेरा मेहताना देने का कष्ट करे।
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प्रेम हिंदवाल ने कहा की एक कलाकार की कला सिर्फ संस्कृति नहीं बढ़ाती बल्कि उनकी ये कलाये उनकी भरण पोषण का जरिया भी है साथ ही प्रेम हिंदवाल ने कहा की उनकों इस बात का दुःख भी रहा की जब उन्होंने संस्कृति विभाग के विरुद्ध आवाज उठायी तो उसके बाद कभी भी संस्कृति विभाग उनको उन्ही के क्षेत्र में प्रोग्राम करने की अनुमति नहीं दी। शायद इसी डर की वजह से कई पीड़ित कलाकार आवाज नहीं उठाते।आखिर कब तक कलाकारों का इस तरह से शोषण होता रहेगा और अगर स्तिथि यहीं रही तो कोई भी उत्तराखंड संस्कृति के लिए काम नहीं करना चाहेगा। शायद अब विभाग को अपनी नीतियों में अपनी गलतियों में सुधर करने की सख्त जरूरत है।
सीमा रावत की रिपोर्ट
प्रेम हिंदवाण फुल इंटरव्यू :-







