स्कूल-कोचिंग फीस बनेगी पहला मुद्दा जनता की आवाज़ सुनेंगे अभिजीत दीपके

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके Abhijit Deepke ने ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इस अभियान के जरिए वह जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे। अभियान का पहला मुद्दा बढ़ती स्कूल, कॉलेज और कोचिंग फीस है। दीपके ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए माता-पिता को कर्ज लेने की नौबत नहीं आनी चाहिए।

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अब सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे। उन्होंने ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से एक नया जनसंपर्क अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। दीपके का कहना है कि इस अभियान के जरिए लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों को समझा जाएगा और उन मुद्दों को उठाया जाएगा, जिनका सीधा असर आम परिवारों की जिंदगी पर पड़ रहा है।

अभियान के तहत शिक्षा को पहला बड़ा मुद्दा बनाया गया है। अभिजीत दीपके का कहना है कि आज अच्छी शिक्षा हासिल करना आम परिवारों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है।

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उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का खर्च इतना बढ़ गया है कि सामान्य आय वाले परिवारों के लिए इसे संभालना आसान नहीं रह गया है। पहली कक्षा से ही कई स्कूलों में फीस लाखों रुपए तक पहुंच रही है। इसके अलावा एडमिशन फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरे खर्च भी अलग से देने पड़ते हैं।

दीपके ने कहा कि सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि कॉलेज और कोचिंग की फीस भी तेजी से बढ़ रही है। कई माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी परिवार को अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए इतना आर्थिक दबाव नहीं झेलना चाहिए। पैसे की कमी के कारण किसी छात्र की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।

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आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर ली जाएगी राय
उन्होंने बताया कि ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के दौरान उनकी पार्टी अलग-अलग शहरों और राज्यों में जाकर लोगों से सीधा संवाद करेगी। इस दौरान शिक्षा के अलावा रोजगार, महंगाई और आम लोगों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी उनकी राय ली जाएगी।

अभिजीत दीपके ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा जरिया है। लेकिन आज शिक्षा धीरे-धीरे महंगी होती जा रही है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है।