नहीं रहे तारक मेहता फेम एक्टर, लिवर सिरोसिस से थे पीड़ित

0
309

तारक मेहता का उलटा चश्मा और कई हिंदी और मराठी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से इंप्रेस करने वाले दर्शकों के चहते स्टार एक्टर सुनील होलकर नहीं रहे. 40 साल के सुनील होलकर के परिवार उनकी मां, पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं. वो नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म गोष्ट एका पैठाणीची में काम कर चुके हैं l

यह भी पढ़े :  सीमा पंगरियाल का नया गीत रिलीज, व्यूज का तोड़े जा रहा आकड़ा

बताते चले कलाकार सुनील होलकर लीवर सोरायसिस की बीमारी से पीड़ित थे l ऐसे में वो लगातार डॉक्टर्स से कंसल्ट कर रहे थे और लम्बे समय से उनका इलाज चल रहा था l बीती स्याम शुक्रवार 13 जनवरी को उन्होंने आखिरी सांस ली l जिसके बाद से उनके चाहितों में शोक की लहर दौड़ पडी l

यह भी पढ़े : जानिए आखिर क्यों इस मंत्री के कहने पर अपने दी जानकारी से मुकरा ISRO

सुनील होलकर के एक्टिंग सफर की अगर बात करें, तो एक्टर ने अशोक हांडे के चौरंग नाट्य संस्थान में कई सा काम किया. सुनील को हमेशा से ही एक एक्टर और कथावाचक के रूप में जाना जाता है. उन्होंने 12 से भी ज्यादा सालों तक थिएटर के जरिए रंगभूमि को कई कमाल के किरदार दिए. महज 40 की उम्र में उनका यूं जाना कला जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है l

हिलीवुड न्यूज़ की ताजातरीन जानकारियों के लिए जुड़े रहिए साथ ही वीडियो रिव्यु एवं अन्य जानकारी यूट्यूब पर भी देखिए  –

 

Previous articleग्लोब अवार्ड जीतने के बाद राजामौली ने कहा बॉलीवुड फिल्म नहीं RRR, भड़के लोग
Next articleनया गीत ‘कनू फ़ोन होएगी तेरु’ हुआ रिलीज, शिवानी के ड्रामे देख दर्शकों को आया मजा
करीना भट्ट एक अनुभवी और समर्पित मीडिया पेशेवर एवं लेखिका हैं, जो वर्ष 2021 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की है, साथ ही उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में परास्नातक (एम.ए.) भी किया है। करीना समाज, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर अपने विश्लेषणात्मक लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी विशेषता केवल खबरों को लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक दक्ष वक्ता भी हैं, जो समाचार प्रस्तुति, रिपोर्टिंग और विचारशील संवाद में भी समान रूप से निपुण हैं। लेखन और वाचन—दोनों माध्यमों में उनकी सशक्त पकड़ उन्हें एक बहुआयामी पत्रकार बनाती है। उनकी लेखनी में न केवल विषय की गहराई होती है, बल्कि सामाजिक सरोकारों की सूक्ष्म समझ और मानवीय दृष्टिकोण भी परिलक्षित होता है। वे आज के बदलते मीडिया परिदृश्य में एक सशक्त और विचारशील आवाज़ के रूप में उभर रही हैं।