थलीसैंण की युवा प्रधान बीरा रावत ने वायरल विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बताई पूरी सच्चाई

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Thalisain's youth leader Bira Rawat broke her silence on the viral controversy and revealed the full truth.

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के थलीसैंण ब्लॉक के मरोड़ा गांव की युवा ग्राम प्रधान बीरा रावत इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। हाल ही में गांव के एक बुजुर्ग के साथ हुए विवाद और उसके बाद वायरल हुए वीडियो ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी। अब इस मामले पर बीरा रावत ने खुलकर अपनी बात रखी है और पूरी घटना की सच्चाई सामने लाई है।

24 वर्षीय बीरा रावत का कहना है कि यह विवाद अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी जड़ पंचायत चुनाव की पुरानी रंजिश में छिपी है। उन्होंने बताया कि जिस बुजुर्ग से उनका विवाद हुआ, उनके परिवार की एक महिला सदस्य पंचायत चुनाव में उनके खिलाफ उम्मीदवार थीं। चुनाव जीतने के बाद से ही लगातार उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था और गांव में उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही थी।

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बीरा रावत के अनुसार, कई बार उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब उनके चरित्र पर सवाल उठाए जाने लगे तो उन्हें मजबूर होकर सामने आना पड़ा। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वह गांव में वन विभाग की चौकी से लौट रही थीं। रास्ते में बुजुर्ग मिले तो उन्होंने सम्मानपूर्वक प्रणाम किया और पूछा कि आखिर उनके बारे में गलत बातें क्यों फैलाई जा रही हैं। इसी दौरान विवाद बढ़ गया।

प्रधान का आरोप है कि बुजुर्ग ने उनके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और कहा कि वह पुरुष अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ घूमती हैं। इस पर बीरा रावत ने उन्हें समझाया कि ग्राम प्रधान होने के नाते सरकारी अधिकारियों के साथ विकास कार्यों और निरीक्षण के लिए जाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के नेतृत्व को गलत नजरिए से देखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बीरा रावत ने बताया कि बात बढ़ने पर बुजुर्ग ने गुस्से में डंडा उठा लिया और उन पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनका हाथ पकड़कर मरोड़ा गया, जिसके बाद वह घबरा गईं और मदद के लिए चिल्लाईं। मौके पर मौजूद एक युवक ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

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विवाद के बाद पुलिस थाने में समझौते की कोशिश हुई। इसी दौरान बुजुर्ग द्वारा बीरा रावत के पैर छूने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया गया। बीरा रावत का कहना है कि उन्होंने किसी को पैर छूने के लिए मजबूर नहीं किया था। उस समय वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं और समझ नहीं पा रही थीं कि कैसे प्रतिक्रिया दें। उन्होंने स्वीकार किया कि उम्र में बड़े व्यक्ति द्वारा पैर छूना उन्हें भी असहज लगा, लेकिन वह उस मानसिक स्थिति में नहीं थीं कि तुरंत उन्हें रोक पातीं।

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बीरा रावत ने कहा कि गांव के अधिकांश लोग उनके साथ खड़े हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही नकारात्मक टिप्पणियों से वह दूरी बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि किसी भी घटना का पूरा सच जाने बिना लोगों को किसी के खिलाफ माहौल नहीं बनाना चाहिए।

युवा प्रधान ने अपने सफर के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वह पहले दिल्ली में सरकारी नौकरी कर रही थीं, लेकिन गांव और पहाड़ के विकास के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। डिजिटल इंडिया, इंटरनेट कनेक्टिविटी और गांव की समस्याओं को लेकर उन्होंने पीएमओ तक शिकायत पहुंचाई, जिसके बाद उनके क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ा मोबाइल टावर दोबारा चालू हुआ और गांव में 4G नेटवर्क शुरू हो सका।

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बीरा रावत अब गांव के विकास, महिलाओं के सम्मान और पहाड़ की समस्याओं को लेकर लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को जज करने से पहले पूरी सच्चाई जरूर जाननी चाहिए।