Gangotri Dham: गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व पर विधिवत बंद, मां गंगा की उत्सव डोली रवाना

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Gangotri Dham: उत्तराखंड के चारधामों में से एक, विश्वविख्यात गंगोत्री धाम के कपाट बुधवार को अन्नकूट पर्व के पावन अवसर पर पूर्व निर्धारित समय से 15 मिनट पहले, सुबह 11:20 बजे शीतकालीन अवधि के लिए वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बंद कर दिए गए। विधिपूर्वक सम्पन्न इस आयोजन के बाद मां गंगा की उत्सव डोली को उनके शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखबा गांव) के लिए रवाना किया गया

 

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कपाट बंद होते ही संपूर्ण धाम क्षेत्र ‘जय मां गंगे’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। उधर, मुखबा गांव में मां गंगा की अगवानी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव स्थित शीतकालीन मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया है, जहां अब आने वाले महीनों में श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन करेंगे।

अन्य धामों में कपाट बंद होने की तैयारियां

गंगोत्री के बाद अब केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज के दिन बंद किए जाएंगे। केदारनाथ में कपाट सुबह 8:30 बजे, जबकि यमुनोत्री में दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे।

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तीर्थ यात्रा को मिल सकती है नई दिशा

स्थानीय व्यवसायियों आशीष सेमवाल और विनय उनियाल का मानना है कि शीतकालीन प्रवास स्थलों—मुखबा (गंगोत्री) और खरसाली (यमुनोत्री)—में तीर्थयात्रा को चालू रखकर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सकता है। इन स्थानों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ-साथ हिमपात का भी आनंद ले सकते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन और आस्था दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

श्रद्धालुओं की भारी आमद

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में इस वर्ष तीर्थयात्रियों की उल्लेखनीय संख्या दर्ज की गई है। यात्रा अवधि के दौरान कुल 14,02,128 श्रद्धालु इन दोनों धामों में पहुंचे। इनमें गंगोत्री धाम में 7,57,762 और यमुनोत्री धाम में 6,44,366 तीर्थयात्री शामिल रहे।

 

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करीना भट्ट एक अनुभवी और समर्पित मीडिया पेशेवर एवं लेखिका हैं, जो वर्ष 2021 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की है, साथ ही उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में परास्नातक (एम.ए.) भी किया है। करीना समाज, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर अपने विश्लेषणात्मक लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी विशेषता केवल खबरों को लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक दक्ष वक्ता भी हैं, जो समाचार प्रस्तुति, रिपोर्टिंग और विचारशील संवाद में भी समान रूप से निपुण हैं। लेखन और वाचन—दोनों माध्यमों में उनकी सशक्त पकड़ उन्हें एक बहुआयामी पत्रकार बनाती है। उनकी लेखनी में न केवल विषय की गहराई होती है, बल्कि सामाजिक सरोकारों की सूक्ष्म समझ और मानवीय दृष्टिकोण भी परिलक्षित होता है। वे आज के बदलते मीडिया परिदृश्य में एक सशक्त और विचारशील आवाज़ के रूप में उभर रही हैं।