
देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जीवनी पर आधारित कथित डॉक्यूमेंट्री “उत्तराखंडियत की ओर” के अनावरण कार्यक्रम को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में उम्मीद से कहीं अधिक संख्या में लोग पहुंचे, जिसके बाद आयोजन चर्चा का विषय बन गया। अब कार्यक्रम के बाद स्वयं हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से भावुक संदेश साझा करते हुए लोगों के प्रेम और समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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हरीश रावत ने कहा कि यह कोई “परफेक्ट डॉक्यूमेंट्री” नहीं थी, बल्कि एक ऐसे नए व्यक्ति का प्रयास था जो इस क्षेत्र में अपनी शुरुआत करना चाहता था। उन्होंने बताया कि आयोजन करने वालों के पास भी इस प्रकार के बड़े कार्यक्रमों का पूर्व अनुभव नहीं था। आयोजन में करीब 800 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वहां 1600 से अधिक लोग पहुंच गए।
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उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों का धन्यवाद किया जो तेज धूप में घंटों खड़े रहे। हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों से पूरी स्थिति को देखा और वह उन लोगों का आभार जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोग केवल उनके प्रति प्रेम और स्नेह के कारण कार्यक्रम में पहुंचे थे। अपने संदेश में हरीश रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में दोनों नेता अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद हमेशा उनके प्रतिद्वंद्वी रहे, लेकिन कभी मन में कटुता नहीं आई। उन्होंने इसे उत्तराखंड की स्वस्थ राजनीतिक परंपरा की मिसाल बताया।
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हरीश रावत ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी और काशी सिंह ऐरी की कार्यक्रम में उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में सम्मान और स्नेह हमेशा बना रहना चाहिए। कार्यक्रम में श्री श्री 1008 स्वामी हरी चैतन्यपुरी जी महाराज की उपस्थिति को भी हरीश रावत ने बेहद भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी केवल फेसबुक पर कार्यक्रम देखकर उन्हें आशीर्वाद देने पहुंचे थे और घंटों कार्यक्रम में मौजूद रहे।
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हरीश रावत ने अपनी जीवन यात्रा को “खुली किताब” बताते हुए कहा कि डॉक्यूमेंट्री के पहले भाग में सामान्य घटनाओं को दिखाया गया है, लेकिन दूसरे भाग में उनकी जीवन यात्रा के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से सामने लाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि “उत्तराखण्डियत” की आवश्यकता को देखते हुए भविष्य में इसका तीसरा भाग भी बनाया जा सकता है।
उन्होंने अंत में सभी लोगों का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके जीवन के कुछ पल लोगों को प्रेरित और उत्साहित करेंगे।







