उत्तराखंड के इतिहास में बीते 29 सितम्बर की तारीख लम्बे समय तक याद रखी जाएगी ,21 सितम्बर को हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC ) की परीक्षा में हुए पेपर लीक मामले में पूरे प्रदेश भर में 8 दिनों तक युवाओं का धरना प्रदर्शन चला,इस धरना प्रदर्शन का केंद्र रहा देहरादून का परेड ग्राउंड जहाँ युवा बेरोजगार संघ और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के बैनर तले 22 सितम्बर से 28 सितम्बर तक डटे रहे और बीते दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धरना स्थल पहुंचकर युवाओं की मांग को संस्तुति दे दी।
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21 सितम्बर को जैसे ही UKSSSC परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया तक़रीबन 1.5 परीक्षार्थियों की वर्षों की मेहनत पर पानी फ़िर गया,युवाओं ने खुद को ढांढस बंधाते हुए बेरोजगार संघ और स्वाभिमान मोर्चा के बैनर तले एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया,सितम्बर माह की उमस भरी गर्मी और देहरादून परेड़ ग्राउंड की सड़क पर युवा अपनी मांगों को लेकर डटे रहे युवाओं की मांग थी कि सरकार के नक़ल विरोधी कानून में स्पष्ट लिखा है कि अगर परीक्षा में एक भी प्रश्नपत्र बाहर आता है या नक़ल का मामला सामना आता है तो तत्काल परीक्षा निरस्त की जाएगी और युवा ये भी मांग कर रहे थे कि हर बार पेपर लीक के मामले अधर में लटके रह जाते हैं इस बार सीबीआई इसकी जांच करे तो भविष्य में ऐसी घटना ना हो सके।
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22 सितम्बर से 29 सितम्बर तक चले पेपर लीक के ख़िलाफ़ आंदोलन में बहुत कुछ हुआ जो पहले कभी ना देखा गया,युवाओं के इस शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने भी और जिलाधिकारी सविन बंसल ने भी युवाओं के इस प्रदर्शन की तारीफ़ की ,लेकिन युवा अपनी मांगों पर अडिग रहे क्योंकि सरकार ने मामले पर संज्ञान लेते हुए SIT (स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ) गठित की लेकिन युवा इससे संतुष्ट नहीं हुए और सीबीआई जांच की मांग पूरे प्रदेश भर में उठने लगी ,हल्द्वानी ,उत्तरकाशी ,विकासनगर ,गोपेश्वर ,श्रीनगर हर जगह युवा सड़क पर उतरे।
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बीते 29 सितम्बर की घटना को अगर चंद शब्दों में लिखा जाए तो प्रीति कुमारी की ये पंक्तियां सटीक बैठती हैं
”क्या नहीं मिलता जहाँ में पाने का हौसला होना चाहिए
जुनून को जिद्द में बदलने वाला चाहिए
झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए
आसमा को धरती पर लाने वाला चाहिए ”
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बीते दिन कुछ ऐसा ही हुआ जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवाओं के बीच पहुंचे और उनके साथ अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मैं फैसला अपने कार्यलय से भी ले सकता था युवा सड़क पर बैठे थे लेकिन गर्मी उन्हें भी महसूस हो रही थी युवाओं की मांग पर सीएम धामी ने सीबीआई मांग की धरना स्थल पर ही संस्तुति दे दी और पेपर निरस्त के मामले में कहा कि ये मामला अब SIT के पास है तो इसका फैसला आयोग और SIT ही ले सकते हैं,और इस तरह से ये छात्र आंदोलन समाप्त हुआ और युवा संघर्ष की जीत के संतोष के साथ अपने अपने घरों को लौटे।
यहाँ देखिए सीएम धामी ने क्या कहा :







