उत्तराखंड में तिग्मांशु धूलिया बनाना चाहते हैं पहाड़ी फिल्में,पढ़ें रिपोर्ट
बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर तिग्मांशू धूलिया इन दिनों अपने कामों में काफी व्यस्त हैं। वो उत्तराखंड में फिल्म और एक्टिंग इंस्टीट्यूट खोलने की तैयारी में लगे हैं। साथ ही अब वो उत्तराखंडी फ़िल्में भी बनाना चाहते हैं। तिग्मांशु धूलिया नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्म डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
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Tigmanshu Dhulia
इन दिनों उत्तराखंड में फिल्म और एक्टिंग इंस्टीट्यूट खोलने के लिए जमीन तलाशने का काम चल रहा है। हालही में उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी को देखते हुए उनका फोकस दून के आसपास के इलाकों पर है।तिग्मांशु धूलिया ने आगे बताया कि सिंगापुर की एक कंपनी इंस्टीट्यूट के लिए निवेश करने को तैयार है। इसके जरिये युवाओं को एक्टिंग और टीवी व फिल्म के तकनीकी पहलुओं की प्रोफेशनल ढंग से जानकारी दी जाएगी।
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उत्तराखंड में गढ़वाली-कुमाऊंनी की अच्छी फिल्में नहीं बनतीं। जो कुछ फिल्में बनी, उनमें से ज्यादातर पुरानी हिंदी फिल्मों की नकलभर है। लोगों को आंचलिक सिनेमा की तरफ ले जाने के लिए अच्छी फिल्में बनानी होंगी। सरकार अगर फंड की व्यवस्था करे, तो मैं फिल्म बनाने को तैयार हूं। बंगला, मलयालम और मराठी सिनेमा की तरह हमें अवॉर्ड विनिंग फिल्में बनानी होंगी।
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उन्होंने कहा कि अभिनेता बनने की इच्छा रखने वालों को कम से कम तीन साल किसी अच्छे एक्टिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग करनी चाहिए। आजकल ज्यादातर फर्जी एक्टिंग स्कूल खुल रहे हैं, जो फिल्म कलाकारों और डायरेक्टर के साथ फोटो दिखाकर युवाओं को धोखा दे रहे हैं।उन्होंने जामिया में हुई बंदूकबाजी की घटना को सस्ती पब्लिसिटी के लिए उठाया कदम बताया। तिग्मांशु ने कहा कि आज हर कोई फेम में आना चाहता है। गलत काम करने वाला जल्दी चर्चा में आता है। नतीजा चाहे जो भी, लेकिन आज बंदूक लहराने वालों को सब जानते हैं।
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एक्टिंग के दौरान डायलॉग डिलीवरी, बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशन जैसी आवश्यक चीजें सिखाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि रोजाना हजारों लोग हीरो बनने की चाह में मुंबई आते हैं। इनमें से 99 फीसदी लोगों को एक्टिंग की एबीसीडी भी नहीं आती। शक्ल-सूरत ठीक होने का मतलब नहीं कि आप हीरो बन जाओगे।
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