आठ साल से इंतज़ार में उत्तराखंड का सिनेमा: Uttarakhand Films Awards आखिर क्षेत्रीय फिल्म पुरस्कार कब मिलेंगे?
उत्तराखंड सरकार समय-समय पर प्रदेश को फिल्म डेस्टिनेशन, फिल्म फ्रेंडली स्टेट और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने की बात करती रही है। नई उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 में भी क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा देने, स्थानीय कलाकारों को अवसर देने और फिल्म पुरस्कारों का प्रावधान शामिल है। लेकिन सवाल यह है कि यदि पुरस्कारों का प्रावधान है, तो पिछले लगभग 6–8 वर्षों से राज्य स्तरीय क्षेत्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन क्यों नहीं हुआ?
यह सवाल केवल किसी संस्था या कुछ कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड फिल्म उद्योग का है।
गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी सिनेमा को जीवित रखने वाले निर्माता, निर्देशक, लेखक, तकनीशियन और कलाकार वर्षों से अपने निजी संसाधनों और खून-पसीने की कमाई से फिल्में बना रहे हैं। सीमित बजट, कम थिएटर, सीमित दर्शक और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वे उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा और लोकजीवन को बड़े पर्दे तक पहुंचा रहे हैं।
दुर्भाग्य की बात यह है कि जिन लोगों के दम पर यह उद्योग आज भी सांस ले रहा है, उन्हें सम्मान देने की सरकारी प्रक्रिया वर्षों से ठप पड़ी हुई है। राज्य सरकार ने नई फिल्म नीति के तहत सब्सिडी, प्रशिक्षण और स्थानीय फिल्मों को प्रोत्साहन जैसी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। यह निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है।
लेकिन केवल नीतियां बना देना ही पर्याप्त नहीं होता। सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
फिल्म पुरस्कार केवल एक ट्रॉफी नहीं होते। वे कलाकार के वर्षों के संघर्ष की पहचान होते हैं। वे नए कलाकारों को प्रेरणा देते हैं, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं और पूरी फिल्म इंडस्ट्री में गुणवत्ता बढ़ाने का काम करते हैं। यदि हर वर्ष राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कार नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो उत्तराखंड के युवा कलाकारों में नया उत्साह आएगा। निर्माता बेहतर विषयों पर काम करेंगे, निर्देशक नए प्रयोग करेंगे और तकनीकी स्तर पर भी प्रदेश का सिनेमा आगे बढ़ेगा।
आज जरूरत केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि उन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की है।
उत्तराखंड के फिल्मकार कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि वर्षों से लंबित उस सम्मान की मांग कर रहे हैं जिसका उल्लेख स्वयं सरकार की नीति में किया गया है।अब समय आ गया है कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट निर्णय ले और जल्द से जल्द राज्य स्तरीय उत्तराखंड फिल्म पुरस्कारों का आयोजन कर प्रदेश के कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्मकारों को उनका उचित सम्मान दे। क्योंकि जब कलाकार सम्मानित होता है, तभी संस्कृति मजबूत होती है। और जब संस्कृति मजबूत होती है, तभी प्रदेश की पहचान देश-दुनिया में और अधिक सशक्त बनती है।








