Uttarakhand News: उत्तराखंड में पशुओं के लिए 34 दवाओं पर प्रतिबंध, केंद्र सरकार के निर्देश पर हुआ फैसलाउत्तराखंड सरकार ने पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली 34 दवाओं पर रोक लगा दी है। यह निर्णय केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।
एफडीए के अपर आयुक्त और राज्य के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि अब राज्य में इन प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण, बिक्री, वितरण और आयात नहीं किया जा सकेगा। यह कदम पशुओं में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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प्रतिबंधित दवाओं की सूची
एंटीबायोटिक दवाएं (15):
इनमें यूरिडोपेनिसिलिन, सेफ्टोबिप्रोल, सेफ्टारोलाइन, साइडरोफोर सेफलोस्पोरिन, कार्बापेनेम्स, पेनेम्स, मोनोबैक्टम्स, ग्लाइकोपेप्टाइड्स, लिपोपेप्टाइड्स, ऑक्साजोलिडिनोन्स, फिडैक्सोमिसिन, प्लाजोमिसिन, ग्लाइसिलसाइक्लिन्स, एरावासाइक्लिन और ओमाडासाइक्लिन शामिल हैं।
एंटीवायरल दवाएं (18):
इन दवाओं में अमैंटाडाइन, बालोक्साविर मार्बॉक्सिल, सेल्गोसिविर, फेविपिराविर, गैलिडेसिविर, लैक्टिमिडोमाइसिन, लैनिनामिवीर, मेथिसाजोन, मोलनुपिराविर, निटाजोक्सानाइड, ओसेल्टामिवीर, पेरामिविर, रिबाविरिन, रिमांटाडाइन, टिजोक्सानाइड, ट्रायजाविरिन, उमिफेनोविर और जानामिवीर के नाम शामिल हैं।
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संक्रमण नियंत्रण की दवा:
इसके अलावा संक्रमण के इलाज में प्रयुक्त एंटी प्रोटोज़ॉल श्रेणी की दवा निटाजोक्सानाइड पर भी पाबंदी लगाई गई है।
केंद्र सरकार का निर्देश
यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 23 सितंबर को जारी निर्देश के तहत लिया गया है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि पशुओं में ऐसे रोगाणुरोधी दवाओं का उपयोग रोका जाए जो इंसानों के इलाज में ‘अंतिम विकल्प’ के तौर पर मानी जाती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जब मनुष्यों को इन दवाओं की आवश्यकता हो, तो वे असरदार बनी रहें।








