Uttarakhand News: टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर से पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी में भर्ती 22 वर्षीय प्रसूता रवीना कठैत की इलाज के दौरान मौत हो गई। रवीना ग्राम पंचायत सेम बासर की रहने वाली थी और गुरुवार सुबह प्रसव पीड़ा के बाद उसे पिलखी अस्पताल लाया गया था।
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जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे रवीना ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। दिनभर उसकी स्थिति सामान्य रही, लेकिन शाम को अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया गया, जहां शुक्रवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि रात के समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। रवीना के पति कुलदीप कठैत, जो एक होटल में काम करते हैं, ने बताया कि उनकी पत्नी को जब तकलीफ हो रही थी, तब अस्पताल में केवल वार्ड बॉय मौजूद था। उनका कहना है कि अगर डॉक्टर समय पर वहां होते तो शायद उनकी पत्नी की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी अस्पताल में 6 सितंबर को अनीशा रावत नाम की महिला ने बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद 15 सितंबर को उसकी भी मौत हो गई थी। लगातार दो प्रसूताओं की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में रात के समय डॉक्टरों की ड्यूटी सुनिश्चित नहीं है और संसाधनों की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
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स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती स्थायी रूप से की जाए और रात के समय इमरजेंसी सेवाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं होता, तब तक पहाड़ के लोगों की मुश्किलें यूं ही बनी रहेंगी।
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