Uttarakhand News: जब चार कंधे भी नहीं मिले अंतिम यात्रा के लिए, पलायन की दर्दनाक कहानी

0
176

Uttarakhand News: पहाड़ों की खामोशी बहुत कुछ कहती है। कभी चूल्हों की गर्माहट और बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजने वाले ल्वेगढ़ गांव में अब सिर्फ सन्नाटा बचा है। रुद्रप्रयाग जिले के कांडई क्षेत्र का यह गांव उत्तराखंड में बढ़ते पलायन की एक मार्मिक मिसाल बन गया है।

बीते दिनों इस गांव की 90 वर्षीय सीता देवी का निधन हो गया। लेकिन उनके पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए गांव में चार कंधे तक नहीं मिले। सीता देवी का बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है और गांव में अब कोई अन्य पुरुष बचा ही नहीं है। दो दिन तक शव घर में ही रखा रहा। आखिरकार, पास के गांव — कलेथ, पांढरा मड़गांव और मलछोड़ा — से कुछ लोग आए, तब जाकर उनका अंतिम संस्कार हो सका।

यह भी पढ़ें: Uttarakhand News: उत्तराखंड में पशुओं के लिए 34 दवाओं पर प्रतिबंध, केंद्र सरकार के निर्देश पर हुआ फैसला

कभी 15 से अधिक परिवारों का बसेरा रहे इस गांव में अब सिर्फ तीन बुजुर्ग महिलाएं और एक पुरुष ही रह गए हैं। गांव तक पहुंचने का रास्ता झाड़ियों और टूटे पगडंडियों से घिरा हुआ है। सड़क नहीं है, पानी की व्यवस्था नहीं, न स्कूल और न ही कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।

पलायन की मार और सूनी रूहें

यह अकेली कहानी नहीं है। उत्तराखंड के सैकड़ों गांव ऐसे ही वीरान हो चुके हैं या होने की कगार पर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1,700 से अधिक गांव ‘घोस्ट विलेज’ यानी पूरी तरह खाली हो चुके हैं। ल्वेगढ़ उन्हीं गांवों की सूची में जुड़ने के अंतिम पायदान पर खड़ा है।

यह भी पढ़ें:Uksssc: स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द, तीन माह में दोबारा आयोजन की तैयारी

विकास के वादे, लेकिन कितनी देर में?

ग्राम प्रधान संजय पांडे कहते हैं, “कार्यकाल शुरू हुआ है, प्रयास कर रहे हैं कि रास्ते जल्द सुधारे जाएं।” स्थानीय विधायक भर सिंह चौधरी का कहना है, “मरछोला तक सड़क स्वीकृत हो चुकी है, अब ल्वेगढ़ को भी सड़क से जोड़ा जाएगा।”

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है — जब तक विकास यहां पहुंचेगा, तब तक क्या यहां कोई बचेगा भी?

सिर्फ पत्थर और यादें बचेंगी?

ल्वेगढ़ अब उस त्रासदी का प्रतीक बन चुका है, जहां न सरकार की योजनाएं पहुंच पाती हैं और न ही गांव के बचे लोग। जो कभी जिंदा गांव था, वह अब बस दीवारों और यादों में कैद होकर रह गया है।

Previous articleUttarakhand News: उत्तराखंड में पशुओं के लिए 34 दवाओं पर प्रतिबंध, केंद्र सरकार के निर्देश पर हुआ फैसला
Next articleKBC: कौन बनेगा करोड़पति में उत्तराखंड की एंजल नैथानी ने रचा इतिहास
करीना भट्ट एक अनुभवी और समर्पित मीडिया पेशेवर एवं लेखिका हैं, जो वर्ष 2021 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की है, साथ ही उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में परास्नातक (एम.ए.) भी किया है। करीना समाज, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर अपने विश्लेषणात्मक लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी विशेषता केवल खबरों को लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक दक्ष वक्ता भी हैं, जो समाचार प्रस्तुति, रिपोर्टिंग और विचारशील संवाद में भी समान रूप से निपुण हैं। लेखन और वाचन—दोनों माध्यमों में उनकी सशक्त पकड़ उन्हें एक बहुआयामी पत्रकार बनाती है। उनकी लेखनी में न केवल विषय की गहराई होती है, बल्कि सामाजिक सरोकारों की सूक्ष्म समझ और मानवीय दृष्टिकोण भी परिलक्षित होता है। वे आज के बदलते मीडिया परिदृश्य में एक सशक्त और विचारशील आवाज़ के रूप में उभर रही हैं।