Uttarakhand: उत्तराखंड में स्वतंत्र पत्रकारिता एक बार फिर निशाने पर है। बारामासा के लोकप्रिय शो एक्स्ट्रा कवर का पिछला एपिसोड यूट्यूब से डिलीट कर दिया गया। कारण, महज़ 7 सेकंड का एक वीडियो क्लिप, जो ABP न्यूज़ का था। यह क्लिप केवल संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल की गई थी, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से धराली आपदा के दौरान यह सवाल पूछा गया था कि “क्या आप सच में हेलिकॉप्टर से कूदने वाले थे?” इस सवाल के संदर्भ में राहुल कोटियाल ने यह दिखाया था कि मुख्यमंत्री की यह बयानबाज़ी और मीडिया कवरेज किस तरह “विज्ञापन-आधारित छवि निर्माण” का हिस्सा बन गई है।
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ABP न्यूज़ ने इस 7 सेकंड के क्लिप पर कॉपीराइट स्ट्राइक मार दी, जिसके बाद यूट्यूब ने एक्स्ट्रा कवर का पूरा एपिसोड ही हटा दिया। जबकि Indian Copyright Act के तहत ऐसे संदर्भों में क्लिप का इस्तेमाल “Fair Use” के दायरे में आता है। यानी, जब कोई वीडियो किसी मुद्दे को समझाने या आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल होता है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जाता। इसके बावजूद जब तक यूट्यूब पर इस विषय में कोई निर्णय नहीं हुआ, एपिसोड को हटा दिया गया।
लेकिन अब बारामासा की टीम ने यह एपिसोड दोबारा री-अपलोड कर दिया है — इस बार ABP न्यूज़ की वह 7 सेकंड की क्लिप हटा दी गई है। एपिसोड के शुरू में राहुल कोटियाल ने खुद बताया कि “एक्स्ट्रा कवर के इस एपिसोड में हमने विज्ञापनों की बंदरबाँट पर विस्तार से चर्चा की थी। लेकिन वह वीडियो यूट्यूब द्वारा डिलीट कर दिया गया क्योंकि उस पर ABP न्यूज़ ने कॉपीराइट स्ट्राइक की थी। वह इस आधार पर कि आधे घंटे के उस वीडियो में 7 सेकंड की एक वीडियो क्लिप इस्तेमाल की गई थी। हालाँकि ऐसा इस्तेमाल Indian Copyright Act के अंतर्गत ‘Fair Use’ माना जाता है लेकिन जब तक इस पर कोई निर्णय नहीं होता, वह वीडियो डिलीट कर दिया गया है। इसलिए हम इस एपिसोड को यहां फिर से अपलोड कर रहे हैं।*”
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इस एपिसोड में राहुल कोटियाल ने बताया कि पिछले पाँच सालों में उत्तराखंड सरकार ने कुल लगभग ₹1000 करोड़ रुपये विज्ञापनों के लिए खर्च किए, जिनमें से सबसे ज़्यादा रकम ABP ग्रुप को दी गई। उनका कहना था कि ABP न्यूज़ को पिछले पाँच वर्षों में ₹16,97,97,789 (सोलह करोड़ सत्तानवे लाख सत्तानवे हज़ार सात सौ नवासी रुपये) दिए गए। यह आँकड़े उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड और सूचना अधिकार (RTI) के ज़रिए प्राप्त दस्तावेज़ों के आधार पर प्रस्तुत किए। राहुल ने विस्तार से बताया कि कैसे “धामी सरकार ने जनता के टैक्स के पैसों से अपनी तारीफ करवाने के लिए मीडिया को खरीदने की प्रक्रिया को एक व्यवस्थित प्रचारतंत्र में बदल दिया है।”
एक्स्ट्रा कवर के इस एपिसोड में सिर्फ़ आँकड़े नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता की ईमानदारी की मिसाल भी थी। राहुल ने बताया कि उत्तराखंड में अनेक अख़बार और चैनल ऐसे हैं जिनका न तो प्रसार है, न पंजीकरण (RNI रजिस्ट्रेशन), फिर भी उन्हें करोड़ों रुपये के सरकारी विज्ञापन दिए गए। यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि राज्य में विज्ञापन अब विकास का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता की छवि चमकाने का औज़ार बन चुके हैं।
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इस पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई। वसूली मोर्चा अभियान के नाम से एक सस्ती वीडियो बनाकर राहुल कोटियाल को बदनाम करने की मुहिम शुरू की गई। वीडियो में उन्हें विदेशी फंडिंग, अर्बन नक्सल, यहाँ तक कि नेपाल और बांग्लादेश से प्रेरित साजिशों से जोड़ने की कोशिश की गई। लेकिन दर्शकों ने इन झूठे आरोपों को खारिज कर दिया और बारामासा के समर्थन में खुलकर सामने आए। बहरहाल आप बारामासा पर विज्ञापनों की हुई बंदरबांट का पूरा वीडियो देख सकते हैं।







