हरिद्वार में VHP का बड़ा संकल्प: हिंदू समाज में दो से तीन बच्चों को बढ़ावा देने पर जोर

0
62

हरिद्वार में आयोजित विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में हिंदू समाज की घटती प्रजनन दर और भविष्य की जनसंख्या संरचना को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। संत समाज और विहिप पदाधिकारियों ने इस विषय को संगठन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने का निर्णय लिया।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव दंडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि विहिप का चिंतन केवल मंदिरों, तीर्थस्थलों और धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था और भविष्य के भारत की जनसंख्या तस्वीर को लेकर भी है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के कई वर्गों में प्रजनन दर 1.5 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुकी है, जो चिंता का विषय है।

नगरासू गुरुद्वारा विवाद: तीर्थयात्री बनकर पहुंचे निहंग, फिर कैसे बढ़ा टकराव? कई सवालों के घेरे में पूरी घटना

बैठक में संत समाज ने हिंदू परिवारों में एक बच्चे के चलन पर चिंता जताते हुए दो से तीन बच्चों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि घटती जनसंख्या दर के दूरगामी सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़ सकते हैं।

संतों ने चर्च और मिशनरी गतिविधियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की तथा सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में शंकराचार्य ने उठाए सवाल,संतों की निष्पक्ष समिति बनाने की मांग

बैठक में लिव-इन रिलेशनशिप और पारिवारिक कानूनों पर भी चर्चा हुई। संत समाज ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था केवल पति-पत्नी के व्यक्तिगत संबंधों का ढांचा नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की आधारशिला है। लिव-इन संबंधों को कानूनी संरक्षण मिलने और उनसे जुड़े अधिकारों के विस्तार को लेकर भी कई सामाजिक और कानूनी प्रश्न उठाए गए।

संत समाज का कहना है कि बदलते सामाजिक ढांचे और घटती प्रजनन दर जैसे विषयों पर व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है, ताकि समाज में इस मुद्दे पर चर्चा और जागरूकता बढ़ाई जा सके।