दून घाटी की छोटी-छोटी नदियों में आई बाढ़ ने दिए गहरे जख्म

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। ऐसा लगा मानो आसमान खुद ज़मीन पर टूट पड़ा हो। बादल इस क़दर बरसे कि शहर और गांवों में तबाही का सैलाब उमड़ पड़ा। अचानक तेज़ बारिश से उफनती नदियों और गिरते पहाड़ों ने न जाने कितनी ज़िंदगियों की लील समाप्त कर दी। अब तक 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 13 से अधिक लोग लापता हैं। हालांकि, मोंठ नदी से दो पुराने शव भी मिले हैं, जिन्हें फिलहाल इस आंकड़े से अलग माना गया है।

 

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जिले की 11 नदियां इस भीषण बरसात के चलते उफान पर आ गईं। इनके गुस्से का आलम यह था कि 13 पुल पूरी तरह से टूट गए और 60 से अधिक सड़कें मलबे और टूट-फूट के कारण बंद हो गईं। सहस्रधारा, जहां लोग अमूमन सुकून और सैर-सपाटे के लिए जाते हैं, अब तबाही का नाम बन चुका है। बादल फटने की वजह से यहां कई मकान और संपत्तियां तबाह हो गईं। फुलेट गांव में एक मकान गिरने से आठ लोग मलबे में दब गए। कई शव शाम तक अलग-अलग इलाकों से निकाले जा चुके थे।

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प्रेमनगर, गुच्चूपानी, मालदेवता, झाझरा, डालनवाला — शहर के कोने-कोने से तबाही की ख़बरें आती रहीं। आसन नदी में खनन कर रहे 15 मज़दूर ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत पानी में बह गए। इनमें से 8 शव मिल चुके हैं, तीन को किसी तरह बचा लिया गया, जबकि चार अब भी लापता हैं। डालनवाला की रिस्पना नदी के पास स्थित मोहिनी रोड पर बना पुल टूट गया। मालदेवता से टिहरी को जोड़ने वाला पुल भी बह गया। यहां की सड़कों और पुलों के निशान तक मिट चुके हैं।
सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य टपकेश्वर मंदिर में देखने को मिला, जहां शिवलिंग तक पानी पहुंच गया। तेज़ बहाव में मंदिर परिसर का पुल टूट गया, और एकादशमुखी हनुमान मंदिर का आधा हिस्सा बह गया।

 

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मसूरी भी इस प्राकृतिक प्रकोप से अछूता नहीं रहा। भट्टा फॉल ने अपना अब तक का सबसे भयावह रूप दिखाया। आसपास की दुकानों में मलबा और पानी घुस गया। दुकानें उजड़ गईं, फर्नीचर बह गया, और रोज़गार की उम्मीदें तबाही में तब्दील हो गईं। वहीं ऋषिकेश की चंद्रभागा, सौंग और जाखन नदियां भी उफान पर रहीं। आमतौर पर शांत रहने वाली इन नदियों के किनारे अब डर और खौफ की कहानी कह रहे हैं। विकासनगर की आसन नदी ने आठ लोगों की जान ले ली और चार अब भी लापता हैं। मोंठ नदी और सुवर्णा जैसी छोटी नदियां भी इस तबाही में किसी बड़ी नदी से कम नहीं रहीं। ऊपर से बहता पानी जब पुलों और घरों से टकराता, तो उसकी आवाज़ लोगों के दिलों में डर की लहर दौड़ा देती। शाम होते-होते एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया। अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।