Dehradun में लंबे समय से चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन फिलहाल एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले पिछले 161 दिनों से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना प्रदर्शन रोकने का फैसला लिया। वहीं परेड ग्राउंड में पानी की टंकी पर पिछले 60 घंटों से डटी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jyoti Rautela और अन्य नर्सिंग अभ्यर्थी भी आखिरकार नीचे उतर आए।
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सरकार और आंदोलनकारियों के बीच लंबी बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह और एसपी सिटी प्रमोद कुमार को मौके पर भेजा गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव सरकार को सौंपे गए, जिन पर सहमति बनने के बाद प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
160 दिन तक धरना और उसके बाद 60 घंटे तक परेड ग्राउंड स्थित पानी की टँकी में चढ़ने के बाद आखिरकार सरकार ने नर्सिंग कर्मचारियों की मांगों पर फैसला करने का निर्णय किया है। जिसका हम तहे दिल से स्वागत करते हैं।
लेकिन हम आज भी कहते हैं अगर सरकार ने आगे कोई भी आनाकानी करी तो हम फिर से… pic.twitter.com/0SVPRAWVq5
— Jyoti Rautela (@JyotiRautela11) May 13, 2026
प्रदर्शन के दौरान टंकी पर मौजूद पांचों लोगों को मेडिकल जांच के लिए कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया। बताया गया कि आंदोलनकारियों ने बीते कई घंटों से केवल लिक्विड डाइट ली थी, जिससे उनकी तबीयत पर असर पड़ सकता है। वहीं ज्योति रौतेला द्वारा शरीर पर पेट्रोल छिड़कने की वजह से उनकी त्वचा पर भी असर देखने को मिला।
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डीजी हेल्थ की ओर से सरकार को भेजे गए प्रस्तावों में कहा गया है कि वर्तमान नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को अंतिम बार वर्षवार आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को मौका मिल सके। इसके अलावा भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में कम से कम दो वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।
60 घंटे बाद नर्सिंग कर्मियों के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के बाद हमने अपना धरना स्थगित किया।
मैंने कल अपने ऊपर पेट्रोल डाला था, लेकिन सरकार द्वारा तब भी कोई एक्शन नहीं लेना स्प्ष्ट बताता है कि इस सरकार के राज में महिलाओं और बेटियों की कोई सुनवाई नहीं है।आज मैं कोरोनेशन अस्पताल में… pic.twitter.com/OXcYgjyJ1N
— Jyoti Rautela (@JyotiRautela11) May 13, 2026
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प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि सेवा के दौरान मरीजों के साथ किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इन प्रस्तावों से आंदोलनकारी संतुष्ट नजर आए और फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।








