“मैत वाली दिसा” में छलका मायके का दर्द, नंदा-शिव की लोककथा को मिला संगीतमय रूप

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The pain of the maternal home spills out in "Maut Wali Disha," a musical take on the folk tale of Nanda and Shiva.

उत्तराखंड के चर्चित रैपर और फेमस गायक सूरज त्राटक तथा लोकप्रिय गायिका प्रियंका मेहर का नया गीत “मैत वाली दिसा” यूट्यूब पर रिलीज़ होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत में पहाड़ की बेटियों के मायके के प्रति प्रेम और भावनाओं को खूबसूरती से दर्शाया गया है। गीत के बोल “मैत वाली दिसा, मैत पैटी जांदी, मेरु मैते तू छोरी बाटू देखी रौंदी” श्रोताओं के दिलों को छू रहे हैं। वहीं, प्रियंका मेहर की भावपूर्ण प्रस्तुति और आकर्षक डांस को दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। गीत की एक खास बात सूरज त्राटक का दमदार रैप भी है, जिसने पारंपरिक लोकसंगीत में आधुनिक अंदाज़ का तड़का लगाते हुए युवाओं को खासा आकर्षित किया है। उनके स्वैग और ऊर्जा से भरपूर रैप ने गीत को एक अलग पहचान दी है।

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देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पहाड़ की भावनाओं को जीवंत करता नया गढ़वाली लोकगीत “मैत वाली दिसा” श्रोताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस गीत को प्रसिद्ध लोकगायक सूरज त्राटक (Suraj Tratak) और प्रियंका मेहर (Priyanka Meher) ने अपनी मधुर आवाज़ से सजाया है, जबकि इसकी कहानी हर उस बेटी के मन की बात कहती है, जो अपने मायके की यादों से गहराई से जुड़ी रहती है।

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गीत की विशेषता इसकी भावनात्मक प्रस्तुति है, जिसमें मां नंदा (पार्वती) और भगवान शिव के विवाह के बाद के जीवन की झलक दिखाई गई है। कथा के अनुसार, विवाह के बाद मां नंदा को अपने मैत (मायके) की याद सताती है। ऐसे कठिन भावनात्मक दौर में भगवान शिव उनका साथ देते हैं और उन्हें इस परीक्षा से उबरने की शक्ति प्रदान करते हैं। यह लोककथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है।

“मैत वाली दिसा” केवल एक गीत नहीं, बल्कि पहाड़ की बेटियों के मन में बसे अपने घर, गांव और बचपन की स्मृतियों का भावनात्मक दस्तावेज है। गीत के बोल, पारंपरिक लोकधुनों और पहाड़ी संगीत के साथ मिलकर श्रोताओं को भावनाओं की एक अनूठी यात्रा पर ले जाते हैं।

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गीत के शानदार दृश्यांकन में उत्तराखंड के मनमोहक पहाड़, प्रकृति की खूबसूरती और लोकजीवन की झलक दिखाई गई है, जो इसकी संवेदनशील कहानी को और प्रभावशाली बनाती है। संगीत प्रेमियों का मानना है कि यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगा।

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रिलीज़ के बाद से “मैत वाली दिसा” को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। दर्शक इसकी भावपूर्ण प्रस्तुति, सुरमयी गायकी और उत्तराखंडी संस्कृति के सजीव चित्रण की सराहना कर रहे हैं।

“मैत वाली दिसा” पहाड़, रिश्तों और मायके के प्रति उस अटूट प्रेम की कहानी है, जो समय और दूरी के बावजूद कभी कम नहीं होता।

वीडियो यहां देखें –