देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami सरकार ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सरकार ने मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण चौधरी की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की संस्तुति की है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट (दीर्घ शास्ति) की कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
सरकार की यह कार्रवाई हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद से जुड़े विवादास्पद मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस प्रकरण में भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद सरकार ने मामले की गहन जांच कराई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी Pushkar Singh Dhami ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इसी नीति के तहत दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की भूमिका को गंभीर माना गया है। इसके चलते उनकी सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के तहत मेजर पनिशमेंट की सिफारिश की गई है।
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प्रदेश सरकार का कहना है कि जनता के धन और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार के सख्त रुख का संकेत है और इससे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी।
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धामी सरकार लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में हुई यह कार्रवाई भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।








